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बेनी दयाल: एक आवाज़ जो बदल गई किस्मत, जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी

बेनी दयाल की कहानी एक प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के बावजूद संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। एक समय था जब उनकी आवाज़ को गायक बनने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया, लेकिन एआर रहमान की मदद से उन्होंने अपने करियर में एक नया मोड़ लिया। जानें कैसे बेनी ने अपने सपनों को साकार किया और आज लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई।
 

बेनी दयाल का सफर


मुंबई, 12 मई। बेनी दयाल की आवाज़ सुनते ही दिल को छू जाती है, जो सुनने वालों में उत्साह भर देती है। लाखों लोग उनकी आवाज़ के दीवाने हैं, लेकिन उनके करियर की शुरुआत आसान नहीं थी। एक बार एक म्यूजिक डायरेक्टर ने उन्हें कहा था कि उनकी आवाज़ गायक बनने के लिए उपयुक्त नहीं है। फिर एआर रहमान ने उनकी जिंदगी में बदलाव लाया।


बेनी दयाल का जन्म 13 मई 1984 को अबू धाबी में हुआ। उनका बचपन नृत्य में बीता, जहां उन्होंने 14 साल तक भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम की शिक्षा ली। कर्नाटक संगीत भी सीखा, लेकिन उनका सपना गायक बनने का नहीं था। स्कूल में वे डांस प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे और जीतते थे।


एक दिन जब किसी ने उन्हें गाते सुना, तो उन्होंने कहा कि वे डांस से बेहतर गाते हैं। इस प्रशंसा ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया। फिर एक दिन 'दिल से' फिल्म का गाना सुनकर उन्होंने संगीत को अपने भविष्य के रूप में चुनने का निर्णय लिया।


स्कूल खत्म होने के बाद बेनी चेन्नई जाना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें पुणे में पढ़ाई करने के लिए कहा। दो महीने तक पिता-पुत्र के बीच चुप्पी रही। अंततः यह तय हुआ कि पहले पढ़ाई पूरी करेंगे। कॉलेज में बेनी ने एक बैंड बनाया और विभिन्न प्रकार के गाने गाए। लेकिन पेशेवर करियर की राह में कई बाधाएं थीं।


वे विभिन्न स्थानों पर जाकर कोरस में गाने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर जगह उन्हें नकारात्मक जवाब मिला। एक म्यूजिक डायरेक्टर ने तो स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी आवाज़ गायक बनने के लिए उपयुक्त नहीं है। आर्थिक समस्याओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण बेनी टूट चुके थे। अंततः उन्होंने एक सीनियर की सलाह पर बीपीओ में एचआर की नौकरी कर ली।


लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोचा था। नौकरी के पहले दिन ही बेनी को एआर रहमान का फोन आया। रहमान ने उनके धार्मिक गीत को सुना और उनकी आवाज़ को पसंद किया। 2008 में तमिल फिल्म 'सक्काराकट्टी' के लिए 'चिन्नम्मा, चिलकम्मा' गाना बेनी को मिला, जो उनके करियर का सबसे बड़ा ब्रेक साबित हुआ।


एआर रहमान ने न केवल उन्हें दक्षिण भारतीय सिनेमा में स्थापित किया, बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी लाया। फिल्म 'गजनी' का गाना 'कैसे मुझे तुम मिल गई' ने उन्हें पहचान दिलाई।


बेनी दयाल ने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी, बांग्ला, गुजराती और मराठी जैसी कई भाषाओं में गाने गाए हैं। वे फ्रेंच और अरबी में भी गा सकते हैं। हिमेश रेशमिया, प्रीतम, सलीम-सुलेमान, और अमित त्रिवेदी जैसे संगीतकारों के साथ काम करने वाले बेनी कहते हैं कि हर रिकॉर्डिंग से पहले उन्हें लगता है कि शायद उनकी आवाज़ इस गाने के लिए उपयुक्त नहीं है।


2016 में बेनी दयाल ने मॉडल कैथरीन थंगम से शादी की। वे स्वतंत्र गाने भी बनाते हैं और देश-विदेश में लाइव परफॉर्मेंस करते हैं।