पृथ्वी दिवस पर दीया मिर्जा ने साझा किया खास संदेश, बेटे को सिखा रही हैं प्रकृति का सम्मान
दीया मिर्जा का पृथ्वी दिवस पर विशेष संदेश
मुंबई, 22 अप्रैल। प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री दीया मिर्जा ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के अपने प्रयासों के तहत पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायक पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट में, उन्होंने अपने बेटे अव्यान को प्रकृति, किसानों और भोजन बनाने वालों के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाने के बारे में बताया।
उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत एक संस्कृत श्लोक से की, जिसमें लिखा है, 'माता भुमि पुत्रोहम पृथ्व्याम', जिसका अर्थ है कि पृथ्वी हमारी मां है और हम उसके संतान हैं।
दीया ने आगे कहा, "अव्यान हर बार भोजन के बाद कहता है, 'थैंक यू मम्मा अर्थ, थैंक यू किसान और थैंक यू उस व्यक्ति को जिसने खाना बनाया।' जब से उसने ठोस भोजन लेना शुरू किया है, तब से उसे यह आदत सिखाई गई है। यह छोटी सी आदत अब हमारे घर में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।"
उन्होंने यह भी बताया कि, ''अब मेरा बेटा खुद को इस धरती का एक नागरिक मानने लगा है। वह समझता है कि जो खाना वह खाता है, जो पानी वह पीता है और जो जीवन वह जीता है, वह सब धरती मां की देन है। जब बच्चे छोटी उम्र से इस सोच के साथ बड़े होते हैं, तो वे न केवल जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील भी होते हैं।''
दीया ने अपने पोस्ट में कहा, "हमें एक ऐसे सिस्टम की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें प्रकृति और धरती के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए। हमारे पूर्वज भी इसी तरह प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीते थे। यदि मिट्टी, मौसम और प्राकृतिक चक्र संतुलित रहेंगे, तो इंसानों की सेहत भी अपने आप ठीक रहेगी।"
उन्होंने आगे कहा, ''बड़े बदलाव केवल बड़े विचारों से नहीं आते, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों से आते हैं। जैसे कि हम क्या खाते हैं, कितना कचरा उत्पन्न करते हैं और प्रकृति के नियमों का कितना सम्मान करते हैं। मेरी सभी से अपील है कि हमें अपने जीवन में इन छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही भविष्य को बेहतर बनाने की असली कुंजी है।''
अपने संदेश के अंत में दीया ने कहा, ''जब हम धरती की देखभाल को प्राथमिकता देते हैं, तो हम वास्तव में अपने और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा कर रहे होते हैं। हम सभी एक 'वन अर्थ फैमिली' का हिस्सा हैं और हमें इसी भावना के साथ जीवन जीना चाहिए।''