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पराग त्यागी ने शेफाली जरीवाला के निधन पर किया भावुक खुलासा, कहा- कुछ अस्वाभाविक था!

अभिनेता पराग त्यागी ने हाल ही में अभिनेत्री शेफाली जरीवाला के निधन पर एक भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें कई चीजें अस्वाभाविक लगीं, लेकिन उन्होंने किसी पर आरोप नहीं लगाया। पराग ने अपने आध्यात्मिक अनुभवों और विश्वास के बारे में भी बात की, जो उन्हें इस कठिन समय में सहारा देने में मददगार साबित हुए। जानें उनके विचार और अनुभव इस लेख में।
 

पराग त्यागी का भावुक बयान


मुंबई, 17 मई। अभिनेता पराग त्यागी ने हाल ही में अभिनेत्री शेफाली जरीवाला के निधन पर एक गहरा और भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें कई चीजें अस्वाभाविक लगीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं और सब कुछ भगवान के हाथ में छोड़ दिया है।


एक विशेष बातचीत में, पराग से पूछा गया कि उन्होंने नकारात्मक ऊर्जा या काले जादू का जिक्र क्यों किया। इस पर उन्होंने कहा, "कुछ घटनाएं मेरे लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वाभाविक थीं। हम दोनों अपनी सेहत के प्रति बहुत सजग थे और नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराते थे। उस समय मैं आध्यात्मिक रूप से भी जुड़ा हुआ था।"


उन्होंने आगे कहा, "उस समय मुझे गहराई से महसूस हुआ कि कुछ ठीक नहीं है, हालांकि मैं इसे पूरी तरह से समझ नहीं पाया। लेकिन 2021 से 2024 के बीच मैंने कई चीजों को समझना शुरू किया। मुझे लगा कि कुछ अस्वाभाविक घटित हुआ था।"


पराग ने यह भी कहा कि वह किसी को दोष नहीं देते। उन्होंने कहा, "मैं भगवान, कर्म और सही समय पर विश्वास करता हूं। मैं हर दिन भगवान से जुड़ता हूं, और मुझे यकीन है कि जब सही समय आएगा, सच सामने आएगा। मैंने सब कुछ भगवान के हाथों में छोड़ दिया है।"


जब उनसे पूछा गया कि क्या काम ने इस कठिन समय में उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद की, तो उन्होंने कहा, "लोग अक्सर कहते हैं कि खुद को व्यस्त रखो, लेकिन हर समय व्यस्त रहना भी भागने जैसा हो सकता है। कोई भी इंसान 24 घंटे काम नहीं कर सकता।"


पवित्र रिश्ता और जोधा अकबर जैसे चर्चित शोज में काम कर चुके पराग ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा ताकत आध्यात्म और सनातन दर्शन से मिली।


उन्होंने कहा, "आध्यात्म से जुड़ने पर दर्द खत्म नहीं होता, लेकिन इससे दर्द सहने की शक्ति जरूर मिलती है। आज की युवा पीढ़ी या तो काम में खो जाती है या इच्छाओं में भटकती है। असली ताकत आध्यात्म, विश्वास, संस्कृति और भगवान से जुड़ाव से आती है, चाहे आप किसी भी धर्म के हों।"