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पंकज उधास की गज़ल 'चिट्ठी आई है': कैसे बदली इस गाने ने उनकी किस्मत?

पंकज उधास, भारतीय संगीत के एक प्रमुख गायक, ने अपने करियर में कई यादगार गाने गाए हैं, लेकिन 'चिट्ठी आई है' ने उन्हें असली पहचान दिलाई। इस गाने की कहानी और राज कपूर की प्रतिक्रिया ने उनके जीवन को बदल दिया। जानें कैसे इस गज़ल ने पंकज के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया। उनका निधन 2024 में हुआ, लेकिन उनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।
 

पंकज उधास का संगीत सफर




नई दिल्ली, 25 फरवरी। पंकज उधास भारतीय संगीत के उन सितारों में से एक हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत गायन से लाखों दिलों को छू लिया। उनके द्वारा गाए गए कई गाने और गज़लें आज भी लोगों की जुबान पर हैं, लेकिन एक विशेष गाना है जिसने उन्हें पहचान दिलाई। यह गाना है 'चिट्ठी आई है', जो 1986 में आई फिल्म 'नाम' का हिस्सा है। इस गाने की कहानी बेहद दिलचस्प है।


शुरुआत में पंकज उधास को इस गज़ल को गाने में कोई खास रुचि नहीं थी। उन्हें लगा कि यह गाना उनके लिए कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं लाएगा, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही तय किया।


जब यह गाना राज कपूर के पास पहुंचा और उन्होंने पंकज उधास से इसे गाने की इच्छा जताई, तो जब पंकज ने इसे गाया, तो वह भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि इस गाने में जो भावनाएं हैं, वह किसी और के लिए गाना मुश्किल है। राज कपूर की यह प्रतिक्रिया पंकज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई।


'चिट्ठी आई है' ने पंकज उधास के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इस गाने के बाद उन्हें फिल्मों और गज़लों में लगातार काम मिलने लगा। लोग उन्हें केवल फिल्मों के गायक के रूप में नहीं, बल्कि गज़ल के जादूगर के रूप में भी पहचानने लगे। उनकी गज़लों में प्यार, रोमांस और भावनाओं की मिठास होती थी।


पंकज उधास को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें 2006 में पद्मश्री और 2025 में पद्मभूषण शामिल हैं। उनके गाने और गज़लें उन्हें देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाने में सफल रही।


उनका निधन 26 फरवरी 2024 को मुंबई में हुआ, लेकिन उनकी आवाज और गज़लें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।