×

दिलजीत दोसांझ ने छात्रों के प्रति लाठीचार्ज पर जताई चिंता, क्या सुनेंगे अधिकारी?

दिलजीत दोसांझ ने दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों से छात्रों की मांगों को सुनने की अपील की है। इस घटना पर सोनू सूद और आयशा अहमद ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। क्या अधिकारी इस बार छात्रों की आवाज सुनेंगे? जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
 

दिलजीत दोसांझ का छात्रों के प्रति समर्थन




मुंबई, 21 जुलाई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को नीट परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई। इस घटना पर अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ ने मंगलवार को अपनी चिंता व्यक्त की।


दिलजीत ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने उच्च अधिकारियों से छात्रों की मांगों को सुनने की अपील की। उन्होंने किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने अनुभवों का भी जिक्र किया।


दिलजीत ने बताया कि उन्हें पहले भी देशद्रोही कहा गया है और अपनी राय रखने के कारण कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ा।


उन्होंने अपने नोट में लिखा, "जो हुआ, वह अत्यंत गलत था। छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से निवेदन करता हूं कि वे छात्रों की आवाज सुनें। लोगों की आवाज ही ईश्वर की आवाज होती है।"


दिलजीत ने आगे कहा, "मुझे पहले भी देशद्रोही कहा गया है और शायद अब भी ऐसा ही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं अभी चर्चा नहीं कर सकता। अब आगे जो होगा, उसे भगवान ही संभालेंगे।"


अभिनेता सोनू सूद ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा, "हमारे छात्रों को लाठियों की जगह गले लगाने वाले हाथ चाहिए।"


अभिनेत्री आयशा अहमद ने भी इंस्टाग्राम पर एक नोट जारी करते हुए कहा, "प्रदर्शन के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे बहुत दुखद और दिल दहला देने वाले थे। मेरे कुछ दोस्त वहां मौजूद थे, जिन्होंने बताया कि लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे। फिर भी जो हुआ, वह हो गया।"


उन्होंने कहा, "मैं उन सभी पर गर्व महसूस करती हूं जो वहां पहुंचे। मुझे अपने देश के भविष्य को लेकर थोड़ी कम निराशा महसूस हो रही है। मुझे विश्वास है कि आज जिन्होंने संघर्ष किया, उनका प्रयास व्यर्थ नहीं जाएगा। कई लोग, जो पहले राजनीति से दूर रहते थे, अब अपनी आवाज उठा रहे हैं। यह एक सकारात्मक कदम है। आज मेरे मन में गर्व, दुख और शर्मिंदगी है।"