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दिलजीत दोसांझ का जीवन मंत्र: तनाव से दूर रहकर जीने की सलाह

दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने लोगों को तनाव देने वाले व्यक्तियों से दूर रहने और जीवन को खुलकर जीने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि फालतू के तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें और दूसरों की राय को अपनी जिंदगी पर असर डालने न दें। जानें उनके इस सरल जीवन मंत्र के बारे में और उनकी हालिया फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के बारे में।
 

दिलजीत का सरल जीवन का मंत्र



मुंबई, 29 सितंबर (वेब वार्ता)। गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में, उन्होंने लोगों को सलाह दी कि उन्हें तनाव देने वाले व्यक्तियों से दूर रहना चाहिए और जीवन को खुलकर जीना चाहिए।


दिलजीत की टीम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह चाय पीते हुए कैमरे के सामने अपनी बात रखते हैं। इस वीडियो में, वह अपने अनुयायियों को एक सरल जीवन जीने का मंत्र देते हैं, जिसमें वह कहते हैं कि फालतू के तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें और दूसरों की राय को अपनी जिंदगी पर असर डालने न दें।


दिलजीत ने कहा, “टेंशन मत लो, चिंता मत करो, जो आपको टेंशन दे, उसे अपनी जिंदगी से निकाल दो। इस दुनिया में कोई टेंशन नहीं है। किसी की भी राय से आपको फर्क नहीं पड़ना चाहिए।”


उन्होंने तनाव देने वाले लोगों से दूरी बनाने की बात को दोहराते हुए कहा, “अपने में मस्त रहो और पता नहीं हम स्वर्ग में फिर कब मिलेंगे। मौज करो ब्रो।”


वीडियो के अंत में उन्होंने ‘राम राम जी’, ‘राम राम सर’ और ‘नमस्कार’ कहकर इसे समाप्त किया। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, “कोई टेंशन नहीं, पता नहीं इस दुनिया में दोबारा कब आओगे।”


काम के संदर्भ में, दिलजीत ने पंजाबी म्यूजिक और हिंदी-पंजाबी फिल्मों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल ही में, वह फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में नजर आए थे, जो देश के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक बुजुर्ग व्यक्ति और उसके पोते (दिलजीत) की भावनात्मक कहानी है।


इस फिल्म में, उन्होंने मुख्य किरदार के पोते ‘निर्वेयर’ का रोल निभाया है, जो अपने 95 वर्षीय दादाजी (ईश्वर सिंह ग्रेवाल उर्फ कीनू, जिनका किरदार नसीरुद्दीन शाह ने निभाया है) की देखभाल करते हैं और उनके भावनात्मक संबल बनते हैं। वह अपने दादाजी के अधूरे अतीत और पाकिस्तान के सरगोधा जाने की अंतिम इच्छा को समझते हैं और उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं।