जुबिन नौटियाल की पहचान की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली, 24 फरवरी। प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने उनकी पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए एआई प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन माध्यमों पर सख्त रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया है।
यह आदेश एकल पीठ द्वारा पारित किया गया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस तुषार राव गेडेला ने की। कोर्ट ने कहा, "जुबिन नौटियाल एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय कलाकार हैं और उनके मामले में पहली नजर में मजबूत आधार है। यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो उनकी छवि और पहचान को गंभीर नुकसान होगा, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।"
जुबिन ने अपनी याचिका में बताया कि उनका नाम, आवाज, गाने का विशेष अंदाज, गायकी की तकनीक, हाव-भाव, तस्वीरें, हस्ताक्षर और उनकी पूरी पहचान उनके व्यक्तित्व अधिकारों का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इन चीजों का बिना अनुमति के उपयोग करना कानून के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ एआई प्लेटफॉर्म्स उनकी आवाज और चेहरे की नकल करके फर्जी ऑडियो और विजुअल कंटेंट बना रहे हैं। मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई की मदद से ऐसे कंटेंट तैयार किए जा रहे हैं, जो वास्तविकता के बेहद करीब हैं और इससे दर्शक धोखा खा सकते हैं।
इसके अलावा, जुबिन ने कोर्ट को बताया कि कई ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर उनके नाम और तस्वीरों वाले पोस्टर, डिजिटल आर्टवर्क और अन्य सामान बेचे जा रहे हैं। ये उत्पाद उनके समर्थन के रूप में पेश किए जा रहे हैं, जो उनकी छवि और विश्वसनीयता को प्रभावित कर रहा है।
इन तथ्यों पर विचार करते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि कोई भी एआई प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या अन्य संस्था जुबिन नौटियाल के व्यक्तित्व अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकेगी। इसमें विज्ञापन, डोमेन नाम, एआई वॉयस मॉडल, सिंथेटिक वॉयस, डिजिटल अवतार, डीपफेक या फेस मॉर्फिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं। यह रोक सोशल मीडिया, वेबसाइट्स और मेटावर्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू होगी।
कोर्ट ने ऑनलाइन इंटरमीडियरीज और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे ऐसे सभी लिंक, पोस्ट, वीडियो और ऐप्स को तुरंत हटाएं या ब्लॉक करें, जो जुबिन नौटियाल के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। साथ ही, इन प्लेटफॉर्म्स को उन लोगों या संस्थाओं की जानकारी साझा करने के लिए भी कहा गया है, जो इस तरह का कंटेंट चला रहे हैं।
इस आदेश को सही तरीके से लागू करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी मामले में शामिल किया गया है। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को समन जारी करते हुए उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब यह मामला सर्विस और प्लीडिंग्स पूरी करने के लिए 28 अप्रैल को जॉइंट रजिस्ट्रार के सामने लिस्ट किया गया है और दिल्ली हाई कोर्ट 25 अगस्त को इस पर सुनवाई करेगा।