☰
×

जावेद अख्तर ने कला और विज्ञान के संगम पर दिया जोर, क्या है उनका नजरिया?

जावेद अख्तर, एक प्रसिद्ध पटकथा लेखक और गीतकार, ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ उदार कलाओं के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कला और मानविकी की समझ इंसान को मशीनों से अलग बनाती है। उनके विचारों में यह भी शामिल है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक-दूसरे के ज्ञान का आदान-प्रदान करना चाहिए। जानें उनके योगदान और विचारों के बारे में इस लेख में।
 

कला और विज्ञान का समन्वय

मुंबई, 25 अक्टूबर। प्रसिद्ध पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उदार कलाओं के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया है।


अख्तर ने कहा कि इतिहास, साहित्य, कविता और चित्रकला जैसे विषयों का ज्ञान एक संतुलित व्यक्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।


उन्होंने बातचीत में बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानव विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन कला और मानविकी की समझ ही हमें मशीनों से अलग बनाती है।


उनका कहना था, “विज्ञान और प्रौद्योगिकी का महत्व है, लेकिन लिबरल आर्ट्स की भी समझ होनी चाहिए। यही इंसान और मशीन के बीच का अंतर है।”


गीतकार ने यह भी कहा कि लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में सीमित नहीं रहना चाहिए। लिबरल आर्ट्स के छात्रों को भी विज्ञान की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।


उन्होंने आगे कहा, “विज्ञान से जुड़े लोगों को भी लिबरल आर्ट्स की जानकारी होनी चाहिए। इतिहास, साहित्य, कविता, चित्रकला और लोक कलाओं की समझ जरूरी है। ज्ञान को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना उचित नहीं है।”


जावेद अख्तर, जो पटकथा लेखक, गीतकार और कवि के रूप में जाने जाते हैं, भारतीय सिनेमा और साहित्य से लंबे समय से जुड़े हुए हैं।


उन्हें सलीम-जावेद की प्रसिद्ध पटकथा लेखन जोड़ी के सदस्य के रूप में पहचान मिली। इस जोड़ी ने ‘जंजीर’, ‘दीवार’, ‘शोले’ और ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी कई ऐतिहासिक हिंदी फिल्मों की पटकथाएं लिखीं, जिन्होंने बॉलीवुड की कहानी कहने की शैली को प्रभावित किया।


बाद में, उन्होंने एक प्रतिष्ठित गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाई और ‘सिलसिला’, ‘1942: ए लव स्टोरी’, ‘बॉर्डर’, ‘रिफ्यूजी’ और ‘लगान’ जैसी फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे।


सिनेमा के अलावा, अख्तर एक प्रसिद्ध उर्दू कवि भी हैं। उनकी चर्चित काव्य कृतियों में ‘तरकश’ शामिल है। भारतीय सिनेमा और साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के साथ-साथ 1999 में पद्म श्री और 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है।