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जन्माष्टमी पर निमरत कौर की भक्ति यात्रा: ब्रज की गलियों में बिखरे रंग!

निमरत कौर ने जन्माष्टमी के अवसर पर ब्रज धाम की गलियों में भक्ति का अनुभव किया। उन्होंने भगवान बांके बिहारी के दर्शन और वृंदावन के प्रसिद्ध व्यंजनों का आनंद लिया। उनकी यात्रा की झलकियां सोशल मीडिया पर साझा की गई हैं, जिसमें निधिवन और यमुना के किनारे के दृश्य भी शामिल हैं। जानें इस यात्रा के बारे में और निमरत के अनुभवों के बारे में।
 

निमरत कौर की भक्ति यात्रा




मुंबई, 4 सितंबर। निमरत कौर ने पर्दे पर कई विविध भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर उनका एक नया रूप देखने को मिला। इस बार, वह कृष्ण की नगरी ब्रज धाम की गलियों में भक्ति में लीन नजर आईं। उन्होंने वृंदावन और बरसाना की यात्रा के दौरान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसमें वह भगवान बांके बिहारी के दर्शन करती और ब्रज के प्रसिद्ध व्यंजनों का आनंद लेती दिखाई दीं।


निमरत ने इंस्टाग्राम पर अपनी यात्रा की झलक साझा की, जिसमें सबसे पहले श्री बांके बिहारी के दर्शन की तस्वीरें थीं। इसके साथ ही, उन्होंने श्री राधा वल्लभ की इत्र सेवा का अनुभव भी साझा किया। ब्रज की गलियों में घूमते हुए, उन्होंने वहां के विशेष पकवानों की झलक भी दिखाई। उनकी पोस्ट में बरसाना की ओर जाने वाले रास्ते, वहां होने वाली श्री कृष्ण लीला और आध्यात्मिक वातावरण का भी वर्णन किया गया।


इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निधिवन भी रहा, जिसे उन्होंने रहस्यमयी और मंत्रमुग्ध कर देने वाली जगह बताया। इसके बाद, उन्होंने यमुना के किनारे का दृश्य भी साझा किया।


अपनी यात्रा के अनुभव को साझा करते हुए निमरत ने लिखा, 'ब्रज धाम की जादुई धूल से धन्य महसूस कर रही हूं। दिव्य प्रभु और प्रेम के रूप में प्रकट इस भूमि से मंत्रमुग्ध और अभिभूत हूं। जो कुछ शब्दों में बयां करना या पूरी तरह कैमरे में कैद करना मुश्किल है, उसकी कुछ झलकियां साझा कर रही हूं। सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं।'


उन्होंने आगे लिखा, 'श्री बांके बिहारी जी, श्री राधा वल्लभ जी की इत्र सेवा, वृंदावन के पकवान, बरसाना के रास्ते, बरसाना में श्री कृष्ण लीला, निधिवन, यमुना जी और ब्रज में भगवान शिव के प्रकट होने से जुड़ी एक रोचक मान्यता बेहद दिलचस्प है।'


जन्माष्टमी का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ा है और इसे विशेष रूप से वृंदावन, मथुरा और बरसाना में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन स्थानों पर मंदिरों से लेकर गलियों तक भक्तों की भीड़ रहती है और जगह-जगह कृष्ण की लीलाओं का मंचन किया जाता है।