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गायक हरिहरन ने राष्ट्रपति मुर्मू से मिलकर किया खास तोहफा पेश, जानें क्या है 'वंदे मातरम' का स्पेशल विनाइल?

गायक हरिहरन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की, जहां उन्होंने 'वंदे मातरम' का एक विशेष विनाइल और टर्नटेबल भेंट किया। इस अवसर को हरिहरन ने अपने परिवार के लिए एक बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने राष्ट्रपति की गर्मजोशी और शालीनता की प्रशंसा की और इस पल को जीवनभर की यादगार बताया। जानें इस खास मुलाकात के बारे में और हरिहरन के संगीत करियर के बारे में।
 

हरिहरन की राष्ट्रपति से मुलाकात




मुंबई, 28 अक्टूबर। प्रसिद्ध गायक हरिहरन ने अपनी पत्नी ललिता हरिहरन के साथ राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से एक सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर को उन्होंने अपने परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सम्मान बताया।


हरिहरन ने इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पर साझा कीं, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके परिवार को राष्ट्रपति को 'द एंथम - वंदे मातरम' का विशेष विनाइल संस्करण और एक खास टर्नटेबल भेंट करने का अवसर मिला।


गायक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की प्रशंसा की और कहा कि उनकी गर्मजोशी और शालीनता देखना एक अद्भुत अनुभव था। उन्होंने अपनी मां अलमेलु मणि के साथ हुई बातचीत को बेहद स्नेहपूर्ण बताया और कहा कि यह पल उनके परिवार के लिए हमेशा यादगार रहेगा।


हरिहरन ने लिखा, "यह हमारे दिलों में हमेशा के लिए बसा एक दिन है।" उन्होंने आगे कहा, "राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति से मिलना मेरे और मेरे परिवार के लिए, चार पीढ़ियों के लिए, एक बड़ा सम्मान था। हमें उन्हें 'द एंथम-वंदे मातरम' का स्पेशल विनाइल एडिशन भेंट करने का सौभाग्य मिला।"


अपनी बात को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, "उनकी गर्मजोशी और सम्मान को देखना, खासकर जब उन्होंने मेरी मां के साथ स्नेह साझा किया, एक ऐसी याद है जिसे हम जीवनभर संजोकर रखेंगे। संगीत राष्ट्र के लिए हमारी एक छोटी सी भेंट है और राष्ट्रपति का आशीर्वाद मिलना इस सफर को पूरा करता है।"


हरिहरन भारत के सबसे प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर्स में से एक हैं, जो हिंदी, तमिल, मलयालम, तेलुगु और अन्य भाषाओं में गाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 1980 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें 2004 में पद्म श्री सहित कई पुरस्कार मिले। उनके प्रसिद्ध गानों में 'तू ही रे', 'रोजा जानेमन' और 'बांहों के दरमियान' शामिल हैं।