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गर्मी से जूझते भारत में सुनील लहरी का पर्यावरण पर जोरदार संदेश!

अभिनेता सुनील लहरी ने हाल ही में बढ़ती गर्मी और पर्यावरण के गिरते संतुलन पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने गर्मी से बचने के उपाय और पौधरोपण के महत्व पर जोर दिया। सुनील ने कहा कि अगर समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में मुश्किलें आ सकती हैं। जानें उनके द्वारा दिए गए सुझाव और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की अपील।
 

गर्मी की मार और पर्यावरण की चिंता


मुंबई, 2 मई। देशभर में गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिससे आम जीवन प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति पर अभिनेता सुनील लहरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से गर्मी से बचने के उपाय और पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन पर चिंता व्यक्त की।


सुनील ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह पसीने से तरबतर नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "पूरे देश में गर्मी का प्रकोप है। तापमान सामान्य से काफी अधिक हो चुका है। मैं बिना सॉना रूम के ही सॉना बाथ का अनुभव कर रहा हूं। आज हर भारतीय इसी स्थिति का सामना कर रहा है।"


सॉना रूम एक विशेष लकड़ी से बना कमरा होता है, जिसे भाप के जरिए 70–90°C तक गर्म किया जाता है। इसका उपयोग शरीर को आराम देने और स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है।


सुनील ने गर्मी के बढ़ने का मुख्य कारण पेड़ों की कमी को बताया। उन्होंने कहा कि अगर हमने समय पर पौधरोपण किया होता, तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते। उन्होंने कहा, "अभी भी समय है। 'देर आए दुरुस्त आए' की कहावत तभी सच होगी जब हम मानसून में अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे।"


अभिनेता ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा, "दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और खुद को हाइड्रेट रखें। लापरवाही न करें, क्योंकि छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है।"


सुनील ने वीडियो के साथ लिखा, "दोस्तों, आज देश की स्थिति के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। अगर हमने समय पर सबक नहीं लिया, तो भविष्य में मुश्किलें आ सकती हैं।"


सुनील लहरी टेलीविजन इंडस्ट्री में एक प्रसिद्ध नाम हैं, विशेष रूप से रामानंद सागर के धारावाहिक 'रामायण' (1987) में लक्ष्मण की भूमिका के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, उन्होंने 'विक्रम और बेताल' और 'दादा-दादी की कहानियां' में भी काम किया है।