गणेश चतुर्थी पर डेलनाज ईरानी और दिव्या दत्ता का खास संदेश: बप्पा का आशीर्वाद और सकारात्मकता
गणेश चतुर्थी का जश्न: डेलनाज और दिव्या की भावनाएं
मुंबई, 15 सितंबर। अभिनेत्री डेलनाज ईरानी और दिव्या दत्ता गणपति बप्पा को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनके लिए बप्पा का आगमन न केवल खुशी लाता है, बल्कि एक विशेष जिम्मेदारी भी होती है। डेलनाज ने बताया कि बप्पा के आने से घर में एक नई खुशी और सकारात्मकता का माहौल बनता है। वहीं, दिव्या ने कहा कि जीवन के विभिन्न चरणों में उन्हें हमेशा ऐसा महसूस हुआ है कि कोई उनका मार्गदर्शन कर रहा है।
डेलनाज ने गणपति के आगमन के क्षणों को याद करते हुए कहा, 'हर साल यह मेरे लिए एक विशेष अवसर होता है। बप्पा के आने से घर में चहल-पहल बढ़ जाती है, लोग एकत्र होते हैं, साथ में भोजन करते हैं और सभी को बप्पा के दर्शन का अवसर मिलता है। मुझे हर साल ऐसा लगता है कि बप्पा का आगमन अपने आप में एक आशीर्वाद है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मेरे लिए बप्पा की पूजा केवल फूल, मोदक और अन्य पूजा सामग्री तक सीमित नहीं है। जब बप्पा घर आते हैं, तो मन में अच्छे विचार, मीठे शब्द और अच्छे कर्म होना चाहिए। भगवान गणेश को मोदक, फूल और नारियल पसंद हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है इंसान का अच्छा व्यवहार। मेरा मानना है कि अगर इंसान अपने कार्यों में अच्छाई रखता है, तो बप्पा भी उससे प्रसन्न होंगे।'
गणपति की सजावट के बारे में डेलनाज ने कहा, 'मैं हर साल सजावट की एक नई थीम बनाने की कोशिश करती हूं। इस बार बप्पा की मूर्ति सफेद रंग की है, इसलिए मैंने सफेद और पर्पल रंग के ताजे फूलों से सजावट की है। मुझे एक पुराना गणपति उत्सव याद है, जब मैंने पूरी ऑरेंज रंग की मूर्ति घर लाई थी। उस समय घर की सजावट भी ऑरेंज थी।'
उन्होंने कहा, 'मैं सूखे फूलों या पौधों का उपयोग करने से बचती हूं। मेरी कोशिश रहती है कि सजावट ताजे फूलों से हो। बप्पा केवल डेढ़ दिन के लिए आते हैं, इसलिए मैं इस समय को खास बनाने में कोई कमी नहीं रखना चाहती। मैं चाहती हूं कि बप्पा को जो चीजें पसंद हैं, उन्हें श्रद्धा से चढ़ाया जाए और परिवार मिलकर उनकी पूजा करे।'
दिव्या दत्ता ने भी गणेश चतुर्थी का त्योहार अपने परिवार के साथ मनाया। उन्होंने कहा, 'जीवन में हमेशा कुछ ऐसा होता है, जहां इंसान को भगवान की शरण में जाना पड़ता है। अगर इरादा अच्छा है, तो भगवान हमेशा मदद करते हैं। कोई गणपति बप्पा को बड़ा भाई मानता है, कोई दोस्त और कोई भगवान, लेकिन रिश्ता चाहे जैसा हो, वह हमेशा इंसान का हाथ थामे रहते हैं।'
दिव्या ने कहा, 'कई बार मुश्किल समय में इंसान को समझ नहीं आता कि जो कुछ हो रहा है, उसका क्या अर्थ है। लेकिन जब वह पीछे मुड़कर देखता है, तो उसे समझ आता है कि उस समय जो हुआ, शायद उसी में आगे की भलाई छिपी थी। उस वक्त भले ही यह बात समझ न आए, लेकिन बाद में लगता है कि बप्पा ने सब कुछ सही दिशा में किया था।'