क्या है मोनालिसा भोसले की शादी का विवाद? जानें इस सनसनीखेज मामले की सच्चाई!
मोनालिसा भोसले का नाबालिग होना साबित
मोनालिसा भोसले के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने उनके नाबालिग होने के दावों की जांच की, जिसमें यह पुष्टि हुई कि वे वास्तव में नाबालिग हैं। मोनालिसा से विवाह करने वाले फरमान खान के लिए यह एक गंभीर समस्या बन गई है, क्योंकि उनके खिलाफ खरगोन जिले के महेश्वर थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग के समक्ष यह मामला उठाया, जिसमें यह साबित हुआ कि मोनालिसा, जो वयस्क के रूप में शादी कर रही थीं, वास्तव में पारधी जनजाति की एक नाबालिग लड़की हैं।
इस मामले को लेकर वकील प्रथम दुबे ने आयोग को बताया कि इस विवाह में केरल के सीपीआई-एम नेताओं और पीएफआई जैसे संगठनों की संलिप्तता है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह विवाह केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि 'लव जिहाद' के खिलाफ एक झूठी कहानी स्थापित करने का प्रयास है।
जांच में सामने आईं कई बातें
एनसीएसटी के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच टीम ने केरल से मध्य प्रदेश तक गहन जांच की। महज 72 घंटे में उन्होंने सच्चाई को उजागर किया। जांच में यह पाया गया कि मोनालिसा को महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में नाबालिग के रूप में दर्ज किया गया है।
जांच की शुरुआत केरल के नयनार देव मंदिर से हुई, जहां यह बताया गया कि मोनालिसा और फरमान की शादी आधार कार्ड में दर्ज उम्र के आधार पर हुई थी। यह विवाह केरल के पुआर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में पंजीकृत किया गया था, जिसमें मोनालिसा के गलत जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया।
गलत जन्मतिथि का मामला
जांच टीम ने पाया कि महेश्वर नगर पालिका द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र में मोनालिसा की जन्म तिथि गलत थी। सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इस आधार पर उनकी शादी 11 मार्च 2026 को हुई, जब उनकी उम्र केवल 16 साल, 2 महीने और 12 दिन थी।
इस मामले में स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे महेश्वर नगर पालिका द्वारा जारी गलत जन्म प्रमाण पत्र को रद्द करें। इस दस्तावेजी साक्ष्य ने विवाह के पक्षकारों की साजिश को उजागर कर दिया।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में पॉक्सो और अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आयोग की सिफारिश पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। फरमान के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
आयोग अब दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। उन्होंने केरल और मध्य प्रदेश के डीजीपी को 22 अप्रैल 2026 को आयोग मुख्यालय में तलब किया है।
आयोग की निगरानी
इस खुलासे के बाद आयोग ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक वह इस मामले पर कड़ी नजर रखेगा। मध्य प्रदेश और केरल के डीजीपी से तीन दिन में मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।