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क्या है बी प्राक की भक्ति का रहस्य? जानें उनके आध्यात्मिक सफर के बारे में!

बी प्राक, जो पंजाबी और बॉलीवुड संगीत में एक प्रसिद्ध नाम हैं, ने हाल ही में आध्यात्मिकता की ओर झुकाव दिखाया है। उन्होंने इंद्रेश महाराज के साथ भक्ति में लीन होकर डांडिया खेला और अपने अनुभवों को साझा किया। इस लेख में जानें कि कैसे उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुखों को भक्ति में बदलकर एक नई राह चुनी।
 

बी प्राक का आध्यात्मिक सफर


नई दिल्ली, 3 अक्टूबर। पंजाबी और बॉलीवुड संगीत जगत में अपनी आवाज से लोगों का दिल जीतने वाले गायक बी प्राक ने हाल ही में आध्यात्मिकता की ओर झुकाव दिखाया है।


उन्हें अक्सर कथावाचक इंद्रेश महाराज और प्रेमानंद महाराज के साथ समय बिताते हुए देखा जाता है। हाल ही में, बी प्राक को भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन होते हुए देखा गया। उन्होंने इंद्रेश महाराज के साथ डांडिया भी खेला। गायक ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इस अनुभव को साझा किया, जिसमें वे इंद्रेश महाराज के साथ भक्ति में मग्न नजर आ रहे हैं।


यह कथा चंडीगढ़ में आयोजित की गई थी, जहां बी प्राक और इंद्रेश महाराज ने 'बरसाने की छोरी' गाने पर भक्तों के साथ डांडिया खेला। वीडियो में इंद्रेश महाराज गाते हुए और भक्त 'राधा रानी' के जयकारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बी प्राक ने इस पल को साझा करते हुए लिखा, "ये दिव्य क्षण हमेशा मेरे दिल में रहेंगे, मैंने जिंदगी का सबसे बेहतरीन अनुभव किया है।"


गायक और इंद्रेश महाराज ने मिलकर कई भक्ति गीतों की रचना की है, जैसे 'राधा गोरी-गोरी', 'प्यारो वृंदावन', और 'राधिका दुलारी', जो भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बी प्राक ने मीडिया में बताया कि 2020 और 2021 में उन्होंने कई करीबी लोगों को खोया, जिससे उबरने के लिए उन्होंने मथुरा-वृंदावन की यात्रा शुरू की।


उन्होंने कहा, "संतों से बातचीत करने के बाद मुझे भगवान के असली खेल को समझने का अवसर मिला।" बी प्राक ने अपने तीन दिन के बच्चे को खोने का दुख भी साझा किया, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी से छिपाया। उसी वर्ष उनके पिता और चाचा का भी निधन हुआ। इन दुखों ने उन्हें भक्ति की ओर अग्रसर किया। बी प्राक को कई बार प्रेमानंद महाराज के पास देखा गया है, जहां उन्होंने अपने बच्चे की मृत्यु से उबरने का उपाय पूछा था। महाराज ने उन्हें बताया, "जन्म-मरण सब निश्चित होता है...वह केवल अपना कर्म भोगने के लिए आया है।"