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क्या है खाटू श्यामजी के लिए एआई-आधारित फिल्म थिएटर प्रोजेक्ट का महत्व?

मुंबई में खाटू श्यामजी को समर्पित एक एआई-आधारित फिल्म थिएटर प्रोजेक्ट का शुभारंभ हुआ है। गायक कन्हैया लाल ने इस प्रोजेक्ट को भक्ति का एक अनोखा माध्यम बताया है, जिसका उद्देश्य खाटू श्यामजी की भक्ति को विश्वभर में फैलाना है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा के लिए बनाई गई है। कन्हैया ने एआई और भक्ति के मेल पर भी चर्चा की और बताया कि यह प्रोजेक्ट युवा पीढ़ी को भक्ति से जोड़ने का एक सकारात्मक प्रयास है।
 

खाटू श्यामजी के प्रति भक्ति का अनोखा प्रोजेक्ट

मुंबई में, 14 जनवरी को एक अनोखे एआई-आधारित फिल्म थिएटर प्रोजेक्ट का उद्घाटन हुआ, जो खाटू श्यामजी को समर्पित है। इस अवसर पर गायक कन्हैया लाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक सेवा है, जिसका उद्देश्य खाटू श्यामजी की भक्ति को विश्वभर में फैलाना है।

कन्हैया लाल ने कहा, ''इस फिल्म का निर्माण केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा के लिए किया गया है। यह पूरी दुनिया को खाटू श्यामजी से जोड़ने का प्रयास है। हालांकि, यह देखना मुश्किल है कि फिल्म व्यावसायिक रूप से कितनी सफल होगी, लेकिन अगर इसे सच्ची भावना से बनाया गया है, तो इसका प्रभाव अवश्य होगा।''

उन्होंने आगे कहा, ''एआई एक मानव निर्मित तकनीक है, लेकिन जब तक इंसान के भीतर ईश्वरीय कृपा नहीं होगी, तब तक सच्ची भक्ति प्रकट नहीं हो सकती। खाटू श्यामजी के जीवन से जुड़ी कई कहानियाँ हैं, जिनके बारे में लोग अभी तक नहीं जानते। बर्बरीक का बचपन, उनके साथी, पांडवों से उनका संबंध और उन्हें मिला वरदान, इन सभी पहलुओं को एआई के माध्यम से जीवंत किया जा सकता है।''

जब उनसे पूछा गया कि एआई फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद उनकी सबसे प्रबल भावना क्या थी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें जिम्मेदारी का एहसास हुआ। उन्होंने कहा, ''भक्ति तो मेरे भीतर पहले से ही थी, लेकिन यह सोचकर गर्व हुआ कि भगवान ने मुझे यह अवसर दिया। पहले मुझे भक्ति का संदेश फैलाने के लिए यात्रा करनी पड़ती थी, लेकिन अब यह संदेश थिएटर के माध्यम से घर बैठे लोगों तक पहुंचेगा।''

धार्मिक कहानियों को नए तरीके से प्रस्तुत करने पर उन्होंने कहा, ''इससे पवित्रता में कमी नहीं आती। यदि फिल्म के जरिए युवा पीढ़ी भक्ति से जुड़ती है, तो यह एक सकारात्मक बदलाव है। भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है; भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाकर इसे साबित किया था।''

अपने अनुभव साझा करते हुए कन्हैया लाल ने कहा, ''जब मैंने पहली बार खाटू श्यामजी के भजन गाए, तो मुझे एक आत्मिक संतोष मिला। मैंने यह भी महसूस किया कि धर्म एक संवेदनशील क्षेत्र है, जिसमें मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। संगीत में प्रयोग की स्वतंत्रता होती है, लेकिन भक्ति में एक सीमा होती है, जिसे पार नहीं किया जा सकता।''

उन्होंने अपने जीवन के बदलाव के बारे में बताया, ''कई वर्षों तक मैंने बिना किसी फीस के भजन गाए। एक समय ऐसा आया जब मैंने भगवान के सामने खड़े होकर यह महसूस किया कि अब ईश्वर ही मेरा मार्गदर्शन करेंगे। इसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और समर्पण के साथ आगे बढ़ता चला गया।''