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क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी' का असली मतलब? जानें विवेक ओबेरॉय और कन्हैया मित्तल की राय

सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। यह व्यंग्यात्मक मुहिम युवाओं की बेरोजगारी और सिस्टम के प्रति नाराजगी को दर्शाती है। अभिनेता विवेक ओबेरॉय और भजन गायक कन्हैया मित्तल ने इस पर अपने विचार साझा किए हैं। विवेक ने लोकतंत्र में हर आवाज के महत्व पर जोर दिया, जबकि कन्हैया ने इसे विपक्ष का प्रचार बताया। जानें इस अभियान की शुरुआत और इसके पीछे की कहानी।
 

कॉकरोच जनता पार्टी पर बढ़ती बहस


वडोदरा, 23 मई। सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। यह व्यंग्यात्मक मुहिम युवाओं की बेरोजगारी और सिस्टम के प्रति नाराजगी को दर्शाती है, और अब यह पूरे देश में एक चर्चित विषय बन चुका है। इस पर फिल्म और संगीत जगत की कई हस्तियों ने भी अपनी राय व्यक्त की है। अभिनेता विवेक ओबेरॉय और भजन गायक कन्हैया मित्तल ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए।


गुजरात के वडोदरा में एक कार्यक्रम के दौरान जब विवेक ओबेरॉय से इस विषय पर सवाल किया गया, तो उन्होंने संतुलित जवाब दिया। विवेक ने कहा, "लोकतंत्र में हर व्यक्ति और समूह को अपनी बात रखने का अधिकार है। विभिन्न विचार और आवाजें ही एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रतीक हैं।"


वहीं, हरियाणा के करनाल में भजन गायक कन्हैया मित्तल ने इस मुहिम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे विपक्ष का प्रचार बताया और कहा, "जिसने यह अभियान शुरू किया, वह पहले आम आदमी पार्टी के लिए काम कर चुका है और विदेश में बैठकर भारत की चिंता कर रहा है। अगर किसी को देश की चिंता है तो उसे भारत में रहकर काम करना चाहिए।"


कन्हैया ने खासकर युवाओं से अपील की कि वे अपनी आवाज उठाएं, लेकिन ऐसे लोगों के पीछे न चलें जिनकी सोच सभी राजनीतिक दलों के लिए समान नहीं है। उन्होंने कहा, "सवाल पूछने का हक सभी पार्टियों से है, केवल एक पार्टी या सरकार को निशाना बनाना उचित नहीं है। युवाओं को खुद को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।"


अपने बयान में कन्हैया ने खुद को 'कॉकरोच' बताया और कहा, "मेरे पास गाने की कोई बड़ी डिग्री नहीं है, लेकिन मेहनत से मैं आगे बढ़ रहा हूं। कई पढ़े-लिखे लोग पीछे रह जाते हैं, और समाज को उनकी चिंता करनी चाहिए।"


यह मुहिम तब शुरू हुई जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोज से की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्द गलत तरीके से पेश किए गए थे।


कॉकरोच वाले बयान को कई युवाओं ने अपने ऊपर तंज माना, जिसके बाद अभिजीत दीपके ने इस नाम से एक व्यंग्यात्मक अभियान शुरू किया। यह अभियान तेजी से फैल गया और लाखों युवाओं तक पहुंच गया। इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी।


इस मुहिम के माध्यम से युवा बेरोजगारी, व्यवस्था और राजनीतिक माहौल पर व्यंग्य कर रहे हैं। कुछ इसे युवाओं के गुस्से की नई आवाज मानते हैं, जबकि अन्य इसे केवल एक सोशल मीडिया ट्रेंड मानते हैं।