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क्या सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर बॉलीवुड सितारों की चिंता सही है?

लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल शुरू की है, जिससे उनका वजन घट गया है। इस पर बॉलीवुड की हस्तियों, जैसे फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने चिंता जताई है। फातिमा ने सरकार से अपील की है कि सोनम जी की सेहत को लेकर चिंता न की जाए। वहीं, श्वेता ने सीजेपी पार्टी के समर्थन को लेकर अपनी असहमति व्यक्त की है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर बॉलीवुड का समर्थन


मुंबई, 16 जुलाई। लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून से भूख हड़ताल शुरू की है, जिसके चलते उनका वजन लगभग 8.5 किलो घट गया है। इस स्थिति को लेकर कई प्रमुख हस्तियों ने चिंता व्यक्त की है। हाल ही में, अभिनेत्री फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा की।


फातिमा सना शेख ने इंस्टाग्राम पर सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "सोनम वांगचुक जी के अनशन को आज 19 दिन हो गए हैं। हमें उनकी सेहत को लेकर चिंता करने में देर नहीं करनी चाहिए। सोनम जी ने देश के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्हें अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए इस तरह अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए।"


उन्होंने आगे कहा, "राजनीति को एक तरफ रखकर, हमारे युवाओं और छात्रों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है। सोनम जी को इस तरह कमजोर होते देखना बहुत दुखद है। मुझे उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालेगी। आज का युवा ही कल का भविष्य है, और हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए।"


श्वेता तिवारी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी, "सोनम वांगचुक जी शिक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है और सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।"


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सीजेपी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। श्वेता ने कहा, "सीजेपी इस मामले को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है, और मैं इससे सहमत नहीं हूं। मेरा समर्थन केवल सोनम वांगचुक और उनके मुद्दे के लिए है, न कि किसी राजनीतिक संगठन के लिए।"


अंत में, उन्होंने कहा, "हमारे राजनीतिक विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हमें ऐसे व्यक्ति को खोने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए जिसने अपने जीवन को देश और शिक्षा के लिए समर्पित किया है। हमें उनके संदेश, स्वास्थ्य और इस समस्या के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"