क्या रिश्तों का टूटना है जीवन का अंत? नासर और नफीसा अली ने साझा की अपनी राय
रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
अभिनेता नासर और सामाजिक कार्यकर्ता नफीसा अली ने अपनी नई फिल्म 'मैक्स, मिन और म्याउजाकी' के प्रमोशन के दौरान रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य और समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। दोनों ने यह स्पष्ट किया कि किसी रिश्ते का टूटना जीवन का अंत नहीं होता और युवाओं को अपनी मानसिक और भावनात्मक सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नासर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ब्रेकअप को जीवन की हार नहीं मानना चाहिए। उन्होंने बताया कि हर रिश्ते में कमिटमेंट का महत्व होता है, लेकिन यदि हालात अस्वस्थ हो जाएं, तो आगे बढ़ना आवश्यक है। मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को थेरेपी लेने में संकोच नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-देखभाल का एक सकारात्मक कदम है।
नफीसा अली ने युवाओं को खुद से प्यार करना सिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कोई रिश्ता हिंसक या अपमानजनक है, तो उसे निभाना सही नहीं है। ऐसे रिश्तों से बाहर निकलने का साहस होना चाहिए।
स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा पर जोर देते हुए, नफीसा ने कहा कि हर परिवार को हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
फिल्मों के बदलते स्वरूप पर नफीसा ने कहा कि आजकल की फिल्मों में रोमांस और संगीत की जगह एक्शन और हिंसा का प्रभाव अधिक है। उन्होंने बताया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सोचने का अवसर भी देता है।
नफीसा ने फिल्म 'धुरंधर' का उल्लेख करते हुए कहा कि उस पर राजनीतिक दबाव का असर स्पष्ट है। उन्होंने युवाओं को ऐसे विषयों को समझने और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाने की सलाह दी।
दोनों कलाकारों ने मानसिक स्वास्थ्य, स्वस्थ रिश्तों और आत्मसम्मान को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं में से एक बताया। उनका मानना है कि खुला संवाद, सही सलाह और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेना युवाओं को बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकता है।