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क्या मुकेश खन्ना का राष्ट्रगान पर बयान सही है? जानें विवाद की पूरी कहानी!

मुकेश खन्ना, ‘शक्तिमान’ के अभिनेता, ने हाल ही में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हटाकर ‘वंदे मातरम्’ को प्राथमिकता देने की मांग की। उनके इस बयान में तथ्यात्मक गलतियाँ हैं, क्योंकि वंदे मातरम् पहले से ही भारत का राष्ट्रीय गीत है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने नए निर्देश जारी किए हैं, जो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के उपयोग को स्पष्ट करते हैं। सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर बहस छिड़ गई है, जिसमें कुछ लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य उनके दावों की आलोचना कर रहे हैं।
 

मुकेश खन्ना का विवादास्पद बयान


‘शक्तिमान’ के मशहूर अभिनेता मुकेश खन्ना हाल ही में अपने एक बयान के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हटाकर उसकी जगह ‘वंदे मातरम्’ को रखने की मांग की है। हालांकि, उनके इस बयान में एक तथ्यात्मक गलती भी सामने आई है। मुकेश खन्ना ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत बनाने की बात की, जबकि यह पहले से ही भारत का राष्ट्रीय गीत है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर तीन साल पहले भी अपनी राय रख चुके हैं।


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उन्होंने यह भी कहा कि ‘जन गण मन’ रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश शासक क्वीन एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा था। खन्ना का मानना है कि देश को ‘जन गण मन’ के बजाय वंदे मातरम् को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने इसे देश की वास्तविक भावना से जुड़ा गीत बताया और लता मंगेशकर द्वारा इसे गाए जाने का भी उल्लेख किया। हालांकि, उनके कई दावे विवादास्पद हैं। सबसे पहले, वंदे मातरम् को पहले से ही राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है, जबकि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है। इस प्रकार, उनकी मांग संवैधानिक स्थिति से मेल नहीं खाती।


सरकार के नए निर्देश

जन गण मन और वंदे मातरम् पर सरकार के नए निर्देश


इस बीच, केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के संबंध में सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा नियमों में यह पहले से निर्धारित है कि किन अवसरों पर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत का गायन किया जाना चाहिए। दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों की अपनी अलग पहचान है। ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के रूप में मान्यता प्राप्त है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला है। सरकारी कार्यक्रमों में इनके उपयोग के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।


मुकेश खन्ना के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य उनके बयान में मौजूद ऐतिहासिक और तथ्यात्मक गलतियों की ओर इशारा कर रहे हैं। फिलहाल, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों के बीच मुकेश खन्ना का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ दोनों ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, और इनकी भूमिका अलग-अलग है।