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क्या आलिया भट्ट और कमल हासन ने छात्र आंदोलन पर उठाई आवाज? जानें क्या कहा!

बॉलीवुड की प्रमुख हस्तियों आलिया भट्ट और कमल हासन ने हाल ही में देश में चल रहे छात्र आंदोलन पर अपनी आवाज उठाई है। आलिया ने छात्रों की मेहनत और उनके सपनों की बात की, जबकि कमल ने शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाए। दोनों ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जो वर्तमान में छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। जानें इन सितारों ने क्या कहा और क्यों यह आंदोलन इतना महत्वपूर्ण है।
 

बॉलीवुड सितारों की छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया


मुंबई, 23 जुलाई। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री आलिया भट्ट ने हाल ही में देश में चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है। इसी क्रम में अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने भी शिक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताओं को साझा किया। उन्होंने सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों की समस्याओं को समय पर सुनना आवश्यक था।


वास्तव में, देश में परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच, कई छात्र संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर मनोरंजन जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी राय दी है।


आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम पर एक नोट साझा करते हुए लिखा, ''हाल के दिनों ने मेरे दिल को कई बार तोड़ा और फिर उम्मीद से जोड़ा। हर छात्र के पीछे एक सपना, परिवार की उम्मीद और वर्षों की मेहनत की कहानी होती है। छात्र केवल अपने लिए नहीं, बल्कि उन लोगों की उम्मीदों का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्होंने उनका साथ दिया है। छात्रों का साहस यह सवाल उठाता है कि क्या हम वास्तव में उन लोगों की बात सुन रहे हैं, जो देश का भविष्य हैं।''


वहीं, कमल हासन ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में देश की शिक्षा प्रणाली की कमियों पर सवाल उठाए। कमल हासन ने कहा कि जब बच्चों की समस्याओं को समय पर नहीं सुना जाता, तो स्थिति गंभीर हो जाती है।


उन्होंने लिखा, ''हमें तब सुनना चाहिए था, जब एक बच्चा रोया था, लेकिन हमने तब तक इंतजार किया, जब तक बहुत सारे बच्चों की आवाजें खामोश नहीं हो गईं।''


कमल हासन ने शिक्षा प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''ऐसी व्यवस्था, जहां पढ़ाई और सीखने की जगह केवल कोचिंग का दबाव हो, जहां जिज्ञासा की जगह डर हो और जहां योग्यता की जगह गलत तरीके से आगे बढ़ने की प्रवृत्ति हो, वह व्यवस्था कमजोर हो जाती है। जब बच्चों को जवाब देने के बजाय बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं, तो यह देश की विफलता है।''


उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपील की कि वे अपना अनशन समाप्त करें। उन्होंने लिखा, ''वांगचुक जी, भविष्य के लिए देश को आपके विवेक की आवश्यकता है। कृपया अपना अनशन खत्म करें। भारत के बच्चों, आप हमारे बीच के सबसे अच्छे इंसान हैं। आपने अपना कर्तव्य निभाया है। अब समय है कि देश आपके लिए अपना कर्तव्य निभाए। आपके सपने हमेशा हमारी कमियों से बड़े होने चाहिए।''