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क्या आप जानते हैं नदीमार्ग नरसंहार की दर्दनाक कहानी? अशोक पंडित ने किया भावुक पोस्ट

अशोक पंडित ने 2003 के नदीमार्ग नरसंहार की बरसी पर एक भावुक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने न्याय की मांग की और इस दर्दनाक घटना को भुलाने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के बलिदान को याद करते हुए वर्तमान स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डाला। यह घटना आज भी कई परिवारों के लिए एक दुखद स्मृति है, जो न्याय की तलाश में हैं।
 

नदीमार्ग नरसंहार की बरसी पर अशोक पंडित का भावुक संदेश




मुंबई, 23 मार्च। 2003 में हुए नदीमार्ग नरसंहार को अब 22 वर्ष हो चुके हैं। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के नदीमार्ग गांव में 23 मार्च की रात लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने 24 कश्मीरी पंडितों की निर्दयता से हत्या कर दी थी। इस दुखद घटना की बरसी पर कश्मीरी पंडित, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।


इस काली तारीख की याद में अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “कभी मत भूलो, कभी माफ मत करो। दुनिया को अब यह दिखावा करना बंद करना चाहिए कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। भारत को इस सच्चाई का सामना करना चाहिए। यह नरसंहार भुलाया नहीं जाना चाहिए।”


अशोक पंडित ने आगे कहा, “नदीमार्ग के वीरान घर उस नरसंहार के मूक गवाह हैं। हर उस आवाज के लिए जिसे चुप करा दिया गया और हर उस आत्मा के लिए जिसे बेघर कर दिया गया, इतिहास उनकी याद रखने की मांग करता है। मानवता न्याय की मांग करती है।”


उन्होंने वर्तमान घटनाओं से जोड़ते हुए कहा, “22 साल पहले नदीमार्ग में हिंदुओं को कतार में खड़ा करके गोली मारी गई थी। आज पहलगाम में पर्यटकों की हत्याएं की गईं। वही विचारधारा, वही निशाना, वही खामोशी।”


अशोक पंडित ने नदीमार्ग नरसंहार के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “उनका बलिदान हमारे दिलों में एक ऐसी खामोशी बनकर बसा है, जो कभी फीकी नहीं पड़ेगी। जब तक हम भूलते रहेंगे, हम इतिहास को दोहराने के लिए अभिशप्त रहेंगे।”


नदीमार्ग नरसंहार कश्मीरी पंडितों के पलायन और उत्पीड़न की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। आज भी गांव के कई घर खंडहर बने हुए हैं और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में हैं।


इस नरसंहार में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। गांव के कई घरों को तबाह कर दिया गया और बचे हुए परिवारों को हमेशा के लिए बेघर कर दिया गया।