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कौन हैं अल्लामा इकबाल? जानें इस महान शायर की प्रेरणादायक कहानी

अल्लामा मोहम्मद इकबाल, एक प्रसिद्ध शायर, ने अपनी लेखनी से न केवल उर्दू साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद को भी प्रेरित किया। उनकी कविताएँ, जैसे 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा', आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। जानें उनके जीवन, विचार और पाकिस्तान के आध्यात्मिक पिता के रूप में उनकी भूमिका के बारे में।
 

अल्लामा मोहम्मद इकबाल: एक अद्वितीय शायर की यात्रा


मुंबई, 20 अप्रैल। 'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है...' ये प्रेरणादायक पंक्तियाँ उर्दू और फारसी के मशहूर शायर अल्लामा मोहम्मद इकबाल की हैं।


पाकिस्तान में जन्मे इस कवि ने धर्म से परे जाकर देश और भगवान राम को प्रेम, पवित्रता और साहस से भरा बताया। उनकी रचना 'लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद' आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।


उर्दू, अरबी और फारसी साहित्य के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर मोहम्मद इकबाल का जन्म भारत के सियालकोट में एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार में हुआ। उस समय भारत और पाकिस्तान एक ही देश थे, जिससे उनकी लेखनी में भारतीय गौरव और उर्दू का संगम देखने को मिलता है। उनकी कविताओं में प्रेम और आत्मविश्वास के साथ-साथ अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की भावना भी झलकती है।


शुरुआत में इकबाल ने केवल उर्दू में कविताएँ लिखीं, लेकिन 1903 तक उन्होंने दर्शनशास्त्र, अंग्रेजी साहित्य और अरबी का ज्ञान प्राप्त कर लिया। उन्होंने ओरिएंटल कॉलेज में अरबी शिक्षक के रूप में कार्य किया। 1908 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में डिग्री प्राप्त की और म्यूनिख यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की।


इकबाल का प्रसिद्ध गीत 'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा' भी उनकी कलम से निकला था। 15 अगस्त 1947 को जब देश ने स्वतंत्रता प्राप्त की, तब इस गीत को संसद भवन में गाया गया। विभाजन के समय उनका मानना था कि देश को दो भागों में बांट देना चाहिए। 29 दिसंबर 1930 को इलाहाबाद में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में उन्हें अध्यक्ष चुना गया, जहाँ उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को मुस्लिम लीग में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।


इकबाल को पाकिस्तान का आध्यात्मिक पिता माना जाता है। उन्होंने अपनी शायरी के माध्यम से मुसलमानों में इस्लाम के प्रति जागरूकता और चेतना जगाई। हालांकि, समय के साथ उनकी सोच में बदलाव आया और वे कट्टरपंथी होते गए।


--News Media


पीएस/पीएम