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कौन थे मुनव्वर राणा? शायरी में मां के प्रति उनके अनमोल जज़्बात

मुनव्वर राणा की शायरी में मां के प्रति गहरी भावनाएं और उनके जीवन के विवादों की कहानी। जानें कैसे उनकी रचनाएं आज भी लोगों के दिलों को छूती हैं। उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके अनमोल जज़्बातों को याद करते हैं।
 

मुनव्वर राणा: शायरी के अनमोल रत्न




मुंबई, 13 जनवरी। शायरी की दुनिया में मुनव्वर राणा की आवाज़ आज भी बेहद लोकप्रिय और दिल को छू लेने वाली मानी जाती है। उनके प्रशंसकों की संख्या अनगिनत है। उन्होंने कई गहरी और भावनात्मक रचनाएं प्रस्तुत की हैं, लेकिन उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना 'मां' पर आधारित है। उनकी शायरी में मां के प्यार, बलिदान और ममता को सरल और भावुक शब्दों में व्यक्त किया गया है, जिससे सुनने वालों की आंखों में आंसू आ जाते हैं।


मुनव्वर राणा की पुण्यतिथि 14 जनवरी को मनाई जाती है। उनकी शायरी में मां का उल्लेख इतना गहरा और भावनात्मक है कि सुनने वाला उसमें खो जाता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि उन्हें नींद में चलने की आदत थी। इस डर से कि कहीं वह कुएं में न गिर जाएं, उनकी मां रातभर कुएं के पास बैठी रहती थीं। वह रोते हुए कुएं से कहती थीं, 'मेरे बेटे को मत डुबोना, यह मेरा इकलौता बेटा है।' इस घटना ने मुनव्वर के दिल में मां के लिए एक विशेष स्थान बना दिया।


जब वह अपने दोस्तों के घर जाते, तो उनकी मां भी उसी स्नेह और ममता से भरी नजर आती थीं। उनकी शायरी में मां के प्रति प्यार और स्नेह बार-बार झलकता है। एक शेर में वह कहते हैं, 'लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती, बस एक मां है जो कभी खफा नहीं होती। इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।'


मुनव्वर राणा ने अपनी शायरी के माध्यम से मां के प्यार, त्याग और ममता को गहराई से व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने कुछ विवादास्पद टिप्पणियां भी कीं, जिसके कारण वह विवादों में फंस गए। किसान आंदोलन के दौरान उनके सोशल मीडिया पोस्ट, राम मंदिर पर उठाए गए सवाल और फ्रांस में एक स्कूल टीचर की हत्या को जायज ठहराने वाली बातें प्रमुख कारण बनीं। इन मुद्दों के चलते वह लगातार सुर्खियों में रहे।


राणा की शायरी सरल शब्दों में गहरी बातें कहती है। वह मां को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत मानते थे। उनका एक और प्रसिद्ध शेर है, 'मां के कदमों में जन्नत है, ये बात हर कोई जानता है।' उनकी शायरी केवल जननी तक सीमित नहीं थी; वह वतन को भी मां की तरह मानते थे। विवादों के बीच उन्होंने कहा था, 'सिरफिरे लोग, हमें दुश्मन-ए जां कहते हैं, हम तो इस मुल्क की मिट्टी को मां कहते हैं।'


विवादों के बीच असहिष्णुता बढ़ने का आरोप लगाते हुए उन्होंने 2015 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी वापस कर दिया था।


मुनव्वर राणा की शायरी में मां का दर्द, मां की दुआ, मां का बलिदान और मां का प्यार हर शब्द में महसूस होता है। उन्होंने मां को इतनी ऊंचाई दी कि लोग उनकी सुनकर कहते हैं, 'मां जैसा कोई नहीं।' मुनव्वर राणा की शायरी का खास अंदाज यह था कि वह जीवन के साधारण पलों को गहराई से व्यक्त करते थे। वह कहते थे कि मां की दुआ से ही इंसान की किस्मत बदलती है। उनकी शायरी में मां का जिक्र केवल शब्द नहीं, बल्कि एक गहरा एहसास है।


अपने अंतिम दिनों में मुनव्वर राणा कई विवादों में घिरे रहे। किसान आंदोलन, राम मंदिर और अन्य मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों ने उन्हें सुर्खियों में रखा। 14 जनवरी 2024 को उनका निधन हो गया।