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कौन थीं एस. जानकी अम्मा? पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, संगीत जगत में छाई शोक की लहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया है। जानकी अम्मा, जिन्हें दक्षिण की कोकिला कहा जाता है, ने 20 भाषाओं में 48,000 से अधिक गाने गाए। उनके निधन को संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। जानें उनके जीवन, करियर और उपलब्धियों के बारे में इस लेख में।
 

प्रधानमंत्री मोदी का शोक संदेश




नई दिल्ली, 12 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इसे संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया।




सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पीएम मोदी ने लिखा, "प्रसिद्ध पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का निधन संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके गाने विभिन्न भाषाओं में कई पीढ़ियों तक लोकप्रिय रहे। उन्होंने हर भावना को अद्वितीय खूबसूरती और विविधता के साथ स्वर दिया। उनकी मधुर आवाज आने वाले वर्षों में भी सुनने वालों को मंत्रमुग्ध करती रहेगी। इस दुखद समय में उनके परिवार, प्रशंसकों और पूरे संगीत जगत के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।"


जानकी अम्मा का जीवन और करियर

दक्षिण की कोकिला के नाम से मशहूर एस. जानकी अम्मा का निधन शनिवार को कर्नाटक के मैसूर में एक निजी अस्पताल में हुआ। उनकी उम्र 88 वर्ष थी। उनकी पोती अप्सरा वैदुला ने सोशल मीडिया पर इस दुखद समाचार की जानकारी दी।




एस. जानकी ने कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी सहित 20 भाषाओं में 48,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जिससे वह इतिहास की सबसे अधिक गाने वाली प्लेबैक सिंगरों में से एक बन गईं। उन्होंने सबसे अधिक गाने कन्नड़ और उसके बाद मलयालम में गाए।




जानकी ने 1957 में तमिल फिल्म 'विधियिन विलायट्टू' से प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा। उसी वर्ष से उनका मलयालम सिनेमा के साथ जुड़ाव शुरू हुआ। अपने पहले वर्ष में ही उन्होंने छह विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए, जो भारतीय संगीत के इतिहास में एक शानदार करियर की शुरुआत थी।




1970 के दशक से, वह मलयालम सिनेमा की प्रमुख महिला आवाज बन गईं और उस समय के लगभग सभी प्रमुख संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। उनके गाने आज भी लोगों की पसंद बने हुए हैं।




जानकी ने 1970 में बेस्ट सिंगर के तौर पर अपना पहला केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड जीता और अगले 15 वर्षों तक इस श्रेणी में उनका दबदबा बना रहा। 1957 से 2017 तक चले अपने करियर में उन्होंने चार राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड और 33 राज्य फिल्म अवॉर्ड जीते।