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के एस चित्रा का 63वां जन्मदिन: भारतीय संगीत की मेलोडी क्वीन

आज के एस चित्रा, भारतीय संगीत की मेलोडी क्वीन, अपना 63वां जन्मदिन मना रही हैं। उनके जीवन और करियर की अनकही कहानियों के साथ, जानें कैसे उन्होंने 36 भाषाओं में गाने गाकर संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उनकी आवाज़ की मिठास और सादगी ने लाखों दिलों को छुआ है। इस विशेष अवसर पर, उनके जीवन की कुछ रोचक बातें साझा की गई हैं।
 

विशेष अवसर पर जन्मदिन की बधाई

आज, 27 जुलाई को, प्रसिद्ध गायिका के एस चित्रा अपना 63वां जन्मदिन मना रही हैं। चित्रा की आवाज में एक अनोखी मिठास और सादगी है, जो हर किसी के दिल को सुकून देती है। उनकी मुस्कान जितनी आकर्षक है, उनकी आवाज उतनी ही भावनात्मक है। के एस चित्रा ने अपने करियर में लगभग 36 भाषाओं में गाने गाए हैं, और उन्हें 'मेलोडी क्वीन ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है। आइए, उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

के एस चित्रा का जन्म 27 जुलाई 1963 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ। उनका असली नाम कोडुर सुब्रमण्यम चित्रा है। उनका पूरा परिवार संगीत से जुड़ा हुआ था, जिससे उनकी संगीत में रुचि बचपन से ही विकसित हुई। उनके पिता, कृष्णन नायर, ने चित्रा को संगीत की प्रारंभिक शिक्षा दी। चित्रा ने शास्त्रीय संगीत में अपनी पकड़ मजबूत की और इसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया।


संगीत करियर की शुरुआत

के एस चित्रा ने 1979 में अपने करियर की शुरुआत की, जब उन्होंने मलयालम फिल्म 'अत्तहसम' के लिए गाना रिकॉर्ड किया। यह फिल्म 1983 में रिलीज हुई थी, लेकिन इससे पहले ही चित्रा की आवाज ने कई भाषाओं में अपनी पहचान बना ली थी।


मलयालम फिल्मों के बाद, उन्होंने तमिल फिल्मों में भी गाना शुरू किया। चित्रा ने हिंदी, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, असामी, उड़िया, पंजाबी और कई अन्य भाषाओं में गाने गाए। 1986 में, उन्हें फिल्म 'सिंधु भैरवी' के गाने के लिए पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उन्होंने लगभग 36 भाषाओं में 25,000 से अधिक गाने गाए हैं, जिसके कारण उन्हें 'मेलोडी क्वीन ऑफ इंडिया', 'केरल की वनंबदी' और 'साउथ की कोकिला' जैसे उपाधियों से नवाजा गया।


हिंदी संगीत में योगदान

1990 के दशक में, चित्रा साउथ इंडिया में एक प्रसिद्ध गायिका बन चुकी थीं। 1991 में, उन्होंने हिंदी सिनेमा में फिल्म 'लव' से शुरुआत की, जिसमें उन्होंने 'साथिया तूने क्या किया' गाना गाया, जो बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्होंने 'ये हसीन वादियां', 'पायलें छन-छन', 'कहना ही क्या', 'गुमसुम गुमसुम', 'कसम की कसम', 'कहीं तो होगी वो', 'मेरे यारा दिलदारा' और 'रूप सुहाना लगता है' जैसे गाने गाए, जो आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं।


अंतरराष्ट्रीय सम्मान

के एस चित्रा को न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी कई बार सम्मानित किया गया है। उन्हें 2003 में ब्रिटेन की संसद में सम्मानित किया गया। 2024 में, उन्हें 'द ग्रेटेस्ट इंडियन सिंगर ऑफ ऑल टाइम्स' का खिताब मिला। इसके अलावा, उन्होंने 10 बार 'फिल्म फेयर साउथ अवॉर्ड' भी जीते हैं।