किताबों से लेकर फिल्मफेयर तक: संतोष आनंद की प्रेरणादायक यात्रा
संतोष आनंद: एक गीतकार की अनोखी कहानी
मुंबई, 4 मार्च। जब हिंदी सिनेमा के दिल को छू लेने वाले गानों की चर्चा होती है, तो गीतकार संतोष आनंद का नाम अवश्य लिया जाता है। उनके द्वारा लिखे गए 'जिन्दगी की ना टूटे लड़ी' और 'मैं ना भूलूंगा' जैसे गाने हर किसी के दिल में बस गए हैं। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि संतोष आनंद ने फिल्मों में कदम रखने से पहले एक स्कूल में लाइब्रेरियन के रूप में कार्य किया। किताबों के साथ बिताए समय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का प्रसिद्ध गीतकार बना दिया।
संतोष आनंद का जन्म 5 मार्च 1940 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद में हुआ। उनका असली नाम संतोष कुमार मिश्र था और वह एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते थे। उन्हें बचपन से पढ़ाई और लेखन का शौक था, और स्कूल के दिनों में ही उन्होंने कविताएं लिखना शुरू कर दिया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से लाइब्रेरी साइंस की डिग्री हासिल की और दिल्ली के मिंटो ब्रिज स्थित एक स्कूल में लाइब्रेरियन के रूप में नौकरी की।
किताबों ने उनकी सोच को और भी गहरा किया। वह अक्सर कहते थे कि पढ़ाई और साहित्य ने उन्हें एक बेहतर इंसान और लेखक बनाया। लाइब्रेरियन रहते हुए भी उनका मन हमेशा कविता में लगा रहता था, और वह कवि सम्मेलनों में भाग लेने लगे। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक मंचीय कवि के रूप में बनने लगी।
उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया जब अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार ने उनकी कविताएं सुनीं। मनोज कुमार उनकी रचनाओं से प्रभावित हुए और उन्हें फिल्म 'पूरब और पश्चिम' के लिए गीत लिखने का अवसर दिया। यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
संतोष आनंद ने 1972 में फिल्म 'शोर' का गाना 'एक प्यार का नगमा है' और 1974 में 'रोटी, कपड़ा और मकान' का गाना 'मैं ना भूलूंगा' जैसे यादगार गीत लिखे। इस गीत के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
1981 में आई फिल्म 'क्रांति' के गीत भी उन्होंने लिखे, जो उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसके बाद 1982 में फिल्म 'प्रेम रोग' के गीत 'मोहब्बत है क्या चीज' के लिए उन्हें दूसरा फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 2016 में उन्हें यश भारती सम्मान से भी नवाजा गया।
संतोष आनंद ने अपने करियर में 26 फिल्मों के लिए 100 से अधिक गाने लिखे। उनकी विशेषता यह थी कि वह अपने गीतों में प्रेम, दर्द और जीवन की सच्चाइयों को बखूबी समाहित करते थे।