☰
×

कल्पना पटवारी: भोजपुरी और असमिया संगीत की धुनों की धुनकार

कल्पना पटवारी, एक प्रसिद्ध भोजपुरी और असमिया गायिका, ने अपने संगीत करियर में कई भाषाओं में गाने गाए हैं। उनका जन्म असम में एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ था। उन्होंने चार साल की उम्र में गायन शुरू किया और बाद में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। 2008 में एक रियलिटी शो में भाग लेने के बाद उन्हें व्यापक पहचान मिली। उनके योगदान के लिए उन्हें 2025 में 'बिहार कला पुरस्कार' से सम्मानित किया जाएगा। जानें उनके जीवन और करियर के बारे में और भी दिलचस्प बातें।
 

कल्पना पटवारी का संगीत सफर


मुंबई, 26 अक्टूबर। भोजपुरी और असमिया लोक संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में कल्पना पटवारी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी गायकी की विशेषता यह है कि उन्होंने हिंदी, भोजपुरी, असमिया, बंगाली, मराठी, पंजाबी, गुजराती, अवधी और तमिल जैसी 30 से अधिक भाषाओं में गाने गाए हैं।


प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर और लोक गायिका कल्पना पटवारी का जन्म 27 अक्टूबर 1978 को असम के बरपेटा जिले के सोरभोग में एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ। उनके पिता, बिपिन नाथ पटवारी, एक प्रसिद्ध लोकगीत गायक हैं, जबकि उनकी मां, जोयमती पटवारी, एक गृहिणी हैं।


कल्पना ने अपने गायन की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही ली। उनके पिता ने बचपन से ही उन्हें असम के पारंपरिक लोकगीतों का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद, उन्होंने उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से संगीत की शिक्षा ली और लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से भारतीय शास्त्रीय संगीत में 'संगीत विशारद' की डिग्री प्राप्त की।


चार साल की उम्र में ही कल्पना ने गायन की दुनिया में कदम रखा, जब बच्चे आमतौर पर जीवन के बारे में कोई समझ नहीं रखते। उन्होंने इस छोटी उम्र में ही सार्वजनिक मंचों पर गाना शुरू कर दिया। उनकी शैक्षणिक योग्यता की बात करें, तो उन्होंने असम के कॉटन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की है।


कल्पना ने भोजपुरी लोकगीतों जैसे पूर्वी, बिरहा, पचरा, कजरी, सोहर, और विवाह गीतों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया। उन्हें भोजपुरी गीतों को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पहली गायिका माना जाता है।


हालांकि उन्होंने कई भाषाओं में गाने गाए, लेकिन उन्हें असली पहचान 2008 में एनडीटीवी इमेजिन के रियलिटी शो 'जुनून: कुछ कर दिखाने का' में भाग लेने के बाद मिली, जिसने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।


कल्पना ने लोकगीतों के साथ-साथ बॉलीवुड और मराठी फिल्मों में भी गाने गाए हैं। गायकी में सफलता के बाद, उन्होंने अभिनय में भी कदम रखा और भोजपुरी फिल्म 'चलत मुसाफिर मोह लियो रे' में दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के साथ अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।


बिहार के लोकगीतों को लोकप्रिय बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और भोजपुरी संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें 2025 में 'बिहार कला पुरस्कार' से सम्मानित किया जाएगा। कल्पना ने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर परवेज खान से विवाह किया है, और इस दंपती के दो बेटे हैं।


--News Media


डीके/एबीएम