कंगना रनोट को मिली बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने AI से बने फर्जी वीडियो पर लगाई रोक
दिल्ली हाईकोर्ट से कंगना को मिली सुरक्षा
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनोट को अपनी पहचान के दुरुपयोग से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाए गए डीपफेक वीडियो, संपादित तस्वीरों, और अन्य आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने मेटा को आदेश दिया है कि वह आदेश की कॉपी प्राप्त करने के 72 घंटे के भीतर संबंधित सामग्री को हटाने या उसकी पहुंच को बंद करने की कार्रवाई करे। इसके साथ ही, संबंधित सरकारी विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे चिह्नित वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य कंगना की पहचान का गलत इस्तेमाल कर बनाई गई सामग्री पर रोक लगाना है।
कंगना ने उठाई थी आपत्ति
कंगना रनोट ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री फैलाई जा रही है। याचिका में कहा गया है कि इसमें AI से बनाई गई अश्लील तस्वीरें, संपादित वीडियो और ऐसे फर्जी बयान शामिल हैं, जो दर्शकों को यह गलतफहमी दे सकते हैं कि कंगना ने वास्तव में कुछ कहा है या किया है। कंगना ने यह भी कहा कि इस तरह की सामग्री उनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा रही है, साथ ही उनकी निजता और व्यक्तिगत पहचान के अधिकारों को भी प्रभावित कर रही है।
मेटा को 72 घंटे में कार्रवाई का आदेश
इस मामले में हाईकोर्ट ने मेटा को चिह्नित सामग्री के संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, मेटा को संबंधित सामग्री की जानकारी और आदेश की प्रति मिलने के 72 घंटे के भीतर उसे हटाना या उसकी पहुंच बंद करना होगा। इस निर्देश के तहत उन वीडियो, तस्वीरों और अन्य सामग्री पर कार्रवाई की जानी है, जिन्हें याचिका में कंगना की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाला बताया गया है। अदालत ने संबंधित सरकारी विभागों से भी चिह्नित वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।
सुनवाई की तारीख और अदालत के निर्देश
इस मामले की सुनवाई 8 अक्टूबर को हुई थी, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना की याचिका पर नोटिस जारी किया था। इसके बाद 12 अक्टूबर को आई रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत प्रदान करते हुए चिह्नित सामग्री हटाने और संबंधित वेबसाइट्स तक पहुंच रोकने के निर्देश दिए। अंतरिम राहत का मतलब है कि मामले की अंतिम सुनवाई और निर्णय से पहले अदालत ने संबंधित पक्षों को कुछ आवश्यक निर्देश दिए हैं, ताकि विवादित सामग्री के प्रसार पर रोक लगाई जा सके।
डीपफेक के खतरे पर ध्यान
AI तकनीक का उपयोग करके किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और हाव-भाव का इस्तेमाल कर भ्रामक वीडियो या तस्वीरें बनाई जा सकती हैं। कई बार ऐसी सामग्री वास्तविक लगती है, जिससे गलत जानकारी फैलने और संबंधित व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा होता है। कंगना रनोट का मामला भी इसी तरह की सामग्री और पहचान के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब चिह्नित कंटेंट और वेबसाइट्स पर कार्रवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही के दौरान अदालत के निर्देशों और संबंधित पक्षों के जवाब पर ध्यान दिया जाएगा।