☰
×

उषा उत्थुप: भारतीय संगीत की जादूगरनी, जिनकी आवाज ने बदली किस्मत!

उषा उत्थुप, भारतीय संगीत की एक प्रमुख गायिका, ने अपनी अनोखी आवाज से संगीत की दुनिया में एक विशेष स्थान बनाया है। उनका सफर 9 साल की उम्र में गाने से शुरू हुआ और उन्होंने कई दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। उनकी आवाज ने उन्हें न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाई। जानें कैसे उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और संगीत के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले।
 

उषा उत्थुप का संगीत सफर

नई दिल्ली, 7 नवंबर। संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए लोग वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी प्रतिभा उन्हें भीड़ से अलग खड़ा कर देती है। भारतीय संगीत की प्रसिद्ध गायिका उषा उत्थुप ऐसी ही एक शख्सियत हैं। उनकी गहरी और शक्तिशाली आवाज ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई है। क्या आप जानते हैं कि जिस आवाज ने उन्हें पहचान दिलाई, उसी के कारण उन्हें कभी स्कूल की म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया था?


उषा उत्थुप का जन्म 8 नवंबर 1947 को मुंबई में एक तमिल परिवार में हुआ। उनके घर में हमेशा संगीत का माहौल बना रहता था। उनके माता-पिता भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ पश्चिमी संगीत के भी शौकीन थे। घर में विभिन्न प्रकार के गाने बजते रहते थे, जिन्हें उषा बड़े ध्यान से सुनती थीं, जिससे उनका संगीत के प्रति लगाव बढ़ता गया।


उन्होंने मुंबई के बायकुला स्थित सेंट एग्नेस हाईस्कूल से शिक्षा प्राप्त की। स्कूल के दिनों में उन्हें संगीत का बहुत शौक था, लेकिन उनकी आवाज बाकी बच्चों से अलग थी। उनकी भारी आवाज के कारण उन्हें एक बार म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया। उस समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही आवाज एक दिन उनकी पहचान बनेगी। उनकी संगीत शिक्षिका ने उन्हें गाने के बजाय म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाने का मौका दिया। हालांकि, संगीत से उनका रिश्ता मजबूत बना रहा।


उषा ने केवल 9 साल की उम्र में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाना गाया। उनकी बहनों को भी संगीत में रुचि थी और वे भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात मशहूर रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी से हुई, जिन्होंने उन्हें रेडियो सीलोन के 'ओवलटीन म्यूजिक आवर' में गाने का मौका दिया। यहां उन्होंने 'मॉकिंगबर्ड हिल' गाया। किशोरावस्था में भी उन्हें कई जगह गाने के अवसर मिले।


उषा उत्थुप का करियर 1969 में चेन्नई से शुरू हुआ, जहां उन्होंने नाइन जेम्स नामक नाइट क्लब में गाना शुरू किया। उनकी पहली प्रस्तुति को दर्शकों ने बहुत पसंद किया, और क्लब के मालिक ने उन्हें एक सप्ताह तक गाने का प्रस्ताव दिया।


इसके बाद उनका सफर कोलकाता पहुंचा, जहां उन्होंने एक प्रसिद्ध नाइट क्लब में परफॉर्म किया। यहीं उनकी मुलाकात जानी चाको उत्थुप से हुई, जिनसे उन्होंने बाद में शादी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली और मुंबई में भी कई जगहों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ने लगी और उन्हें बड़े मंचों पर गाने के अवसर मिलने लगे।


उषा उत्थुप की दमदार आवाज ने फिल्मी दुनिया का ध्यान भी आकर्षित किया। 1970 में फिल्म 'बॉम्बे टॉकी' से उन्होंने बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की। इसके बाद 1971 में फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' के लिए भी उन्होंने गाया। आगे चलकर उन्होंने आरडी बर्मन और बप्पी लाहिड़ी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया।


उनकी आवाज में एक अलग ऊर्जा और आकर्षण था, जिससे वह पॉप, जैज, रॉक और भारतीय फिल्मी संगीत जैसे विभिन्न शैलियों में गा सकती थीं। 'रंभा हो हो हो', 'मेहबूबा मेहबूबा' और 'डार्लिंग' जैसे गानों ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।


उषा उत्थुप की पहचान केवल भारत तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विदेशों में भी कई शानदार प्रस्तुतियां दीं, विशेषकर केन्या में, जहां उनके गानों को बहुत पसंद किया गया। वहां उन्होंने स्थानीय भाषा स्वाहिली में भी गाने गाए।


संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2011 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके बाद 2024 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया। उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई अन्य पुरस्कार भी जीते हैं।


उषा उत्थुप अपनी रंगीन साड़ियों, बड़ी बिंदी, पारंपरिक गहनों और शानदार स्टेज परफॉर्मेंस के लिए भी जानी जाती हैं।