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अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग पर मजेदार अंदाज में किया सच्चाई का जिक्र, कहा- 'ये बिजनेस है!'

मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने हाल ही में अपने ब्लॉग पर एक मजेदार टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने सच्चाई और बिजनेस के बीच के संबंध पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे उनके ब्लॉग पोस्ट को गलत तरीके से पेश किया जाता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर उन्होंने सभी को शांति और समृद्धि की शुभकामनाएं भी दी। जानें उनके विचार और इस त्योहार का महत्व।
 

अमिताभ बच्चन का मजेदार ब्लॉग पोस्ट




मुंबई, 14 सितंबर। मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और अक्सर अपने ब्लॉग के माध्यम से अपने विचार साझा करते हैं। हाल ही में, उन्होंने एक मजेदार टिप्पणी करते हुए बताया कि उनके ब्लॉग पोस्ट को किस तरह से दर्शकों के सामने पेश किया जाता है।


अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा, "काम जारी है, इस त्योहार की रौनक के बीच अपनों के घर जाने का निमंत्रण जब वे 'गणपति' को घर लाते हैं। आशीर्वाद लेने के लिए और ब्लॉग पर लिखी बातों के अजीब अर्थ निकाले जाने की विसंगतियां, जो हंसी से भी परे हैं।"


त्योहारों के जश्न के बीच गणपति का स्वागत करते हुए, उन्होंने खबरों में 'सबसे पहले' बनने की होड़ पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस दौड़ में कई बार सच्चाई को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने आगे लिखा, "लोगों के बीच सबसे पहले आने की बेचैनी, ताकि उन्हें ध्यान और पैसा मिल सके, भले ही इसके लिए बात का गलत मतलब निकालना पड़े या खबर देने वालों को ही भाषा की सही समझ न हो। यही आज के दिन हंसी का विषय है।"


उन्होंने यह भी कहा, "सच्चाई को दिखाने के लिए फालतू और गलत बातें जोड़ देना, ताकि वह असली लगे, यह उस पल की कीमत पर किया गया बिजनेस है जो कभी हुआ ही नहीं था।"


अंत में, उन्होंने लिखा, "अगर कंटेंट खरीदा गया है, तो उसकी लागत वसूल करनी ही होगी, यह बिजनेस है और सच्चाई भाड़ में जाए। मैं इंतजार कर रहा हूं कि मेरे इस ब्लॉग की बात को कैसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाएगा और अब मैं आराम करता हूं।"


अमिताभ बच्चन ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना भी की। उन्होंने लिखा, "गणपति का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे। शांति, समृद्धि और खुशी के लिए।"


गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार की शुरुआत गणेश की मूर्तियों की स्थापना से होती है, जो घरों में और बड़े पंडालों में सबके सामने होती हैं।