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अनुपम खेर ने सूरज बड़जात्या को क्यों कहा 'नेशनल ट्रेजर'? जानें उनके खास रिश्ते की कहानी!

अनुपम खेर ने सूरज बड़जात्या के जन्मदिन पर उन्हें 'नेशनल ट्रेजर' कहकर एक भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने उनके साथ बिताए समय और उनके सिनेमा की सादगी की सराहना की। जानें इस खास रिश्ते की कहानी और कैसे सूरज बड़जात्या भारतीय सिनेमा में एक अनमोल धरोहर बने हैं।
 

अनुपम खेर का भावुक संदेश


मुंबई, 22 फरवरी। भारतीय फिल्म उद्योग में कुछ रिश्ते केवल पेशेवर नहीं होते, बल्कि समय के साथ गहरे दोस्ती में बदल जाते हैं। ऐसा ही एक संबंध है दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या के बीच। रविवार को सूरज बड़जात्या के जन्मदिन पर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने सूरज को 'नेशनल ट्रेजर' कहा और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।


अनुपम खेर ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'जन्मदिन मुबारक हो सूरज बड़जात्या... आप भारतीय सिनेमा की एक अनमोल धरोहर हैं। आज के समय में, जब सिनेमा तेजी से बदल रहा है, तब भी आप ऐसी फिल्में बनाते हैं जिनमें रिश्तों की अहमियत, पारिवारिक मूल्य, विश्वास और अच्छाई की झलक मिलती है। बहुत कम लोग आज ऐसे विषयों पर फिल्में बनाने की हिम्मत करते हैं, लेकिन आपने बिना किसी दिखावे के लगातार यही रास्ता अपनाया है। आपके सिनेमा में भारत बसता है।'


अनुपम खेर ने अपने पोस्ट में उनके साथ बिताए लंबे समय को भी याद किया। उन्होंने कहा, 'मेरा और सूरज का रिश्ता 1984 की फिल्म 'सारांश' से शुरू हुआ था। तब से लेकर अब तक मैंने सूरज बड़जात्या के सफर को बहुत करीब से देखा है। यह सफर स्थिर, सधा हुआ और अपने मूल विश्वासों पर टिका हुआ रहा है। उन्हें जानना मतलब दयालुता, करुणा, ईमानदारी और सच्ची खुशी को जानना है।'


उन्होंने आगे कहा, 'सूरज बड़जात्या की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है। उनके काम में न तो कोई शोर है और न ही उनके व्यवहार में कोई बनावट। वह बिना किसी प्रचार के अपने काम पर भरोसा करते हैं और इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। यही कारण है कि उनकी फिल्में सीधे दिल से जुड़ती हैं और हर उम्र के दर्शकों को अपनी लगती हैं।'


इस पोस्ट में अनुपम खेर ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह सूरज बड़जात्या की शर्ट पर भारत का एक छोटा सा सुनहरा प्रतीक लगाते हुए नजर आते हैं।


अनुपम खेर ने इस पर लिखा, 'यह मेरा प्रतीकात्मक तरीका है, यह कहने का कि सूरज बड़जात्या अपने सिनेमा और अपने दिल में भारत को बसाए हुए हैं। वह जो कहानियां सुनाते हैं, जो भावनाएं सहेजते हैं और जिन मूल्यों का जश्न मनाते हैं, वही भारत की असली आत्मा को दर्शाते हैं।'