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अनुपम खेर का बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश: क्या उम्र का मतलब है 'बेमतलब'?

अनुपम खेर ने हाल ही में एक वीडियो के माध्यम से युवा पीढ़ी को बुजुर्गों का सम्मान करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ ज्ञान और अनुभव का महत्व कैसे बढ़ता है। खेर ने यह भी कहा कि बुजुर्ग समाज का बोझ नहीं, बल्कि एक जीवित इतिहास हैं। उनके विचारों में यह स्पष्ट है कि किसी को 'इर्रेलिवेंट' कहना न केवल गलत है, बल्कि मूर्खता भी है। जानें उनके विचार और समाज में बुजुर्गों की भूमिका के बारे में।
 

अनुपम खेर का प्रेरणादायक संदेश


मुंबई, 14 अगस्त। अभिनेता अनुपम खेर सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं और अक्सर अपने विचार साझा करते हैं। हाल ही में, उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के माध्यम से युवा पीढ़ी को बुजुर्गों का सम्मान करने का संदेश दिया।


वीडियो में, खेर ने कहा, "आजकल एक नया शब्द 'इर्रेलिवेंट' बहुत सुनने को मिलता है, खासकर बुजुर्गों के लिए। क्या उम्र बढ़ने पर बुजुर्गों का ज्ञान और अनुभव बेकार हो जाता है? क्या भगवान हमें यह संदेश भेजते हैं कि अब आपकी सेवा की जरूरत नहीं है?"


उन्होंने आगे कहा, "क्या आपके माता-पिता और दादा-दादी भी आपके लिए 'बेमतलब' हैं? इतिहास में कई वैज्ञानिकों और कलाकारों ने 70 या 80 की उम्र में अद्भुत कार्य किए हैं। जवानी ऊर्जा देती है, लेकिन उम्र अनुभव देती है, जो किसी ऑनलाइन टूल से नहीं मिल सकता।"


अभिनेता ने कहा, "कभी-कभी युवा सोचते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है, लेकिन बुजुर्गों को यह समझ है कि जीवन में बहुत कुछ ऐसा है जो किसी को नहीं पता। बुजुर्ग समाज का बोझ नहीं, बल्कि एक जीवित इतिहास हैं। इसलिए किसी को 'इर्रेलिवेंट' कहना गलत है।"


अनुपम खेर ने अपने वीडियो के साथ लिखा, "जवानी में जोश और रफ्तार होती है, लेकिन अनुभव एक शक्ति है। कई महान लोग जैसे नारायण मूर्ति और जेम्स कैमरून 70 की उम्र पार कर चुके हैं और आज भी नई चीजें कर रहे हैं। इसलिए बुजुर्गों को बेकार समझना न केवल बदतमीजी है, बल्कि मूर्खता भी है।"