हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी पर 'राधा रास बिहारी' से किया सबको मंत्रमुग्ध!
जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी का डांस बैले
मुंबई, 4 सितंबर। बॉलीवुड की प्रसिद्ध अदाकारा हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी के अवसर पर अपने नृत्य बैले 'राधा रास बिहारी' की एक अद्भुत झलक प्रस्तुत की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह राधा के रूप में नजर आ रही हैं, पारंपरिक परिधान और सुंदर गहनों के साथ। उनके शास्त्रीय नृत्य की मुद्राएं दर्शकों को बेहद आकर्षित कर रही हैं।
इस वीडियो में हेमा मालिनी अपनी नृत्य मंडली के साथ मंच पर प्रस्तुति देती दिखाई दे रही हैं, जबकि एक अन्य कलाकार कृष्ण का किरदार निभा रहा है। यह प्रस्तुति राधा और कृष्ण के प्रेम और भक्ति को शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से दर्शाती है।
वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, ''जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर अपने डांस बैले 'राधा रास बिहारी' की झलक साझा कर रही हूं। यह जन्माष्टमी सभी के जीवन में शांति, खुशियों और समृद्धि लेकर आए। राधे-राधे... जय श्री कृष्ण।''
'राधा रास बिहारी' हेमा मालिनी की प्रसिद्ध नृत्य प्रस्तुतियों में से एक है, जिसमें राधा और कृष्ण के संबंधों को शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से दर्शाया जाता है। उन्होंने अपने करियर में कई बार इस बैले का प्रदर्शन किया है, जो उनके लिए भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हेमा मालिनी ने मात्र पांच वर्ष की आयु में भरतनाट्यम सीखना शुरू किया था। उनकी मां, जया चक्रवर्ती, ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके नृत्य करियर को आगे बढ़ाने में मदद की। उनका बचपन दिल्ली में बीता, जहां उन्होंने छोटी उम्र से ही मंच पर नृत्य प्रस्तुतियां देना शुरू कर दिया था।
भरतनाट्यम की शिक्षा के बाद, हेमा ने कुचिपुड़ी भी सीखी और चेन्नई में प्रसिद्ध गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से प्रशिक्षण लिया।
हेमा मालिनी की नृत्य यात्रा से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा रेखा से भी जुड़ी है। हाल ही में 'इंडियन आइडल' में हेमा ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह चेन्नई में भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ले रही थीं, तब रेखा भी उन्हीं क्लासेज में आती थीं।
उन्होंने बताया कि रेखा बचपन में काफी शरारती थीं और कई बार रिहर्सल के दौरान भाग जाया करती थीं, जिससे गुरुजी के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता था।
समय के साथ, हेमा मालिनी ने नृत्य को बड़े मंच पर पहुंचाया और कई यादगार डांस बैले तैयार किए, जैसे 'दुर्गा', 'मीरा', 'रामायण', 'सावित्री', 'राधा कृष्ण' और 'राधा रास बिहारी', जिनके माध्यम से उन्होंने पौराणिक और आध्यात्मिक कहानियों को शास्त्रीय नृत्य में प्रस्तुत किया।