सौरभ शुक्ला का अनोखा नजरिया: परफेक्शन नहीं, अपूर्णता में है असली खूबसूरती!
सौरभ शुक्ला का जीवन दर्शन
नई दिल्ली, 25 मार्च। अभिनेता और फिल्म निर्माता सौरभ शुक्ला का मानना है कि जीवन में परफेक्शन का कोई अस्तित्व नहीं है, और हर व्यक्ति में कुछ न कुछ कमी होती है। वह 'परफेक्ट शादी' या 'परफेक्ट रिश्ता' जैसे विचारों को खारिज करते हैं। उनके अनुसार, इंसान की अपूर्णता ही रिश्तों की असली खूबसूरती है।
सौरभ ने एक बातचीत में कहा, "भगवान का शुक्र है कि इस दुनिया में कोई चीज परफेक्ट नहीं है। हम सभी अपूर्ण हैं और हमें अपनी इस अपूर्णता का जश्न मनाना चाहिए। परफेक्शन में कोई सुधार की गुंजाइश नहीं होती, जबकि अपूर्णता में हमेशा कुछ नया करने की संभावना रहती है। सच कहूं तो, परफेक्शन बहुत बोरिंग होता है।"
उन्होंने यह भी बताया कि रिश्तों में परफेक्शन की उम्मीद रखना गलत है। असल जिंदगी में अपूर्णताओं को स्वीकार करना और उन्हें प्यार से संभालना ही महत्वपूर्ण है। सौरभ ने गहराई से सोचते हुए कहा, "इंसान के दृष्टिकोण से इस जीवन में केवल एक चीज परफेक्ट है, और वह है मृत्यु। हमें नहीं पता कि मरने के बाद क्या होता है।"
सौरभ ने रिश्तों की ताकत पर जोर देते हुए कहा, "ईमानदारी किसी भी रिश्ते की असली ताकत होती है। हर व्यक्ति को अपने रिश्ते में एक खुली किताब की तरह होना चाहिए। जब कोई अपने साथी से सच छुपाता है, तो यह रिश्ते के लिए हानिकारक होता है।"
उन्होंने आगे कहा, "जब झूठ सामने आता है, तो रिश्ते में दर्द इस बात का होता है कि आपको उस बारे में बताया नहीं गया। यह एक बड़े धोखे का एहसास कराता है, जिससे शक पैदा होता है और रिश्ते की नींव कमजोर हो जाती है।"
सौरभ शुक्ला ने 'जॉली एलबी', 'जॉली एलएलबी 2' और 'रेड' जैसी सफल फिल्मों में काम किया है। उनकी हालिया फिल्म 'जब खुली किताब' भी इसी विषय पर आधारित है, जिसमें एक बुजुर्ग दंपति की कहानी है। फिल्म में एक राज खुलने के बाद उनके रिश्ते में उथल-पुथल मच जाती है, और परिवार प्यार, माफी और एक-दूसरे को समझने की कोशिश करता है।