सुलोचना चव्हाण: लावणी की रानी जिनकी आवाज़ ने दिलों को छू लिया
सुलोचना चव्हाण का अद्वितीय संगीत सफर
नई दिल्ली, 16 मार्च। मराठी संगीत और लावणी की दुनिया में सुलोचना चव्हाण का नाम हमेशा के लिए अमर रहेगा। उनकी गायकी में जो गहराई और ऊर्जा थी, वह उनकी मेहनत का परिणाम थी। उन्होंने किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बिना, केवल ग्रामोफोन रिकॉर्ड सुनकर अपने गायन का अभ्यास किया। यह उनकी मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण है।
सुलोचना चव्हाण का जन्म 13 मार्च 1933 को मुंबई के फणसवाडी क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव संगीत की ओर था। उन्होंने कभी भी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा नहीं ली, बल्कि ग्रामोफोन रिकॉर्ड सुनकर गायन का अभ्यास किया। घंटों तक रिकॉर्ड सुनने और स्वर तथा ताल को समझने की उनकी लगन ने उन्हें एक अद्वितीय गायिका बना दिया।
उनका पहला गाना महज नौ साल की उम्र में रिकॉर्ड किया गया, जो हिंदी फिल्म 'कृष्ण सुदामा' के लिए था। संगीतकार श्याम बाबू पाठक की सहायता से उन्होंने यह गाना रिकॉर्ड किया, और इसके बाद उनका करियर लगातार ऊंचाइयों की ओर बढ़ता गया।
सुलोचना चव्हाण ने कई प्रसिद्ध गायकों जैसे मोहम्मद रफी, मन्ना डे, शमशाद बेगम और गीता दत्त के साथ पार्श्वगायन किया। केवल 16 वर्ष की आयु में, उन्होंने मन्ना डे के साथ भोजपुरी रामायण में गाने गाए। उनके गायन की गहराई और समझ ने बेगम अख्तर को भी प्रभावित किया। सुलोचना ने मराठी के अलावा हिंदी, गुजराती, भोजपुरी, तमिल और पंजाबी भाषाओं में भी गाने गाए।
लावणी की दुनिया में उनका पहला बड़ा मुकाम 'हीच माझी लक्ष्मी' फिल्म की लावणी से आया, जिसने उनके करियर को एक नई दिशा दी। उन्होंने आचार्य अत्रे द्वारा दी गई 'लावणीसम्राज्ञी' की उपाधि को गर्व से स्वीकार किया। उनका मानना था कि लावणी की शुरुआत हमेशा मजबूत होनी चाहिए, और यह दृष्टिकोण उनके हर गाने में स्पष्ट था।
सुलोचना चव्हाण ने अपने करियर में कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए, जिनमें 2010 में लता मंगेशकर पुरस्कार, 2012 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2022 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें लोकशाहीर पाटील बापूराव पुरस्कार और राम कदम पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।
उनका करियर लगभग 60 वर्षों तक चला, जिसमें उन्होंने सोलो गाने, पार्श्वगायन और लाइव परफॉर्मेंस के माध्यम से दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया।
सुलोचना चव्हाण ने 10 दिसंबर 2022 को 92 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।