सुरैया: कैसे एक फिल्म सेट ने बदल दी एक अदाकारा की किस्मत?
सुरैया का अद्भुत सफर
मुंबई, 14 जून। हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अदाकारा सुरैया ने अपनी खूबसूरती, बेहतरीन अभिनय और मधुर आवाज से लाखों दिलों पर राज किया। एक समय था जब उनकी लोकप्रियता किसी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं थी। दिलचस्प बात यह है कि सुरैया का फिल्मों में आने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन एक फिल्म की शूटिंग देखने के लिए वह सेट पर गईं और यहीं से उनके करियर की शुरुआत हुई।
सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर में हुआ, जो अब पाकिस्तान में है। उनका पूरा नाम सुरैया जमाल शेख था। जब वह एक साल की थीं, तब उनका परिवार मुंबई में बस गया। उनके मामा एम. जहूर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, जिससे उन्हें बचपन से ही फिल्मी माहौल देखने का अवसर मिला। बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के बच्चों के कार्यक्रम में गाना गाना शुरू कर दिया था। उनकी आवाज ने लोगों का दिल जीत लिया।
सुरैया के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वह अपने मामा के साथ फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो गईं। वह केवल शूटिंग देखने गई थीं, लेकिन वहां के निर्देशक नानूभाई वकील ने उन्हें देख लिया। सुरैया की मासूमियत और आकर्षक व्यक्तित्व ने निर्देशक को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने उन्हें तुरंत फिल्म में मुमताज महल का किरदार दे दिया। यह उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा था। यहीं से सुरैया के फिल्मी करियर की असली शुरुआत हुई।
अभिनय के साथ-साथ सुरैया की गायकी भी लोगों को बहुत पसंद आई। मशहूर संगीतकार नौशाद ने जब उनकी आवाज सुनी, तो वह काफी प्रभावित हुए और उन्हें फिल्म 'शारदा' में गाने का मौका दिया। इस फिल्म में उन्होंने 'मेरे दिल की सजन समझा दो' और 'ये रेल हमारे घर की देखो' जैसे गाने गाए, जो उस समय बेहद लोकप्रिय हुए।
इसके अलावा, 'दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है', 'तू मेरा चांद, मैं तेरी चांदनी', 'वो पास रहे या दूर', 'तारारी तारारी', 'ओ दूर जानेवाले', 'मन मोर हुआ मतवाला', 'धीरे-धीरे आ रे बादल', 'चुप-चुप खड़े हो जरूर कोई बात है', 'ये ना थी हमारी किस्मत' जैसे गानों में भी उन्होंने अपनी आवाज दी।
सुरैया ने 'अनमोल घड़ी', 'प्यार की जीत', 'विद्या', 'दिल्लगी', 'बड़ी बहन', 'शायर', 'दास्तान', 'अफसर', 'सनम', 'दीवाना', 'मिर्जा गालिब' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया। उनकी जोड़ी अभिनेता देव आनंद के साथ बेहद पसंद की गई। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी प्रेम कहानी भी चर्चा का विषय रही। हालांकि, परिवार और धर्म के कारण उनकी शादी नहीं हो सकी। यह प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती है।
सुरैया का स्टारडम इतना बड़ा था कि उनके घर के बाहर फैंस की भीड़ लगी रहती थी। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते थे। वह उस समय की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में से एक थीं। कहा जाता है कि कई बड़े अभिनेता भी उनके साथ काम करने की इच्छा रखते थे। उनकी लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि विदेशों में भी उनके फैंस मौजूद थे।
लगभग चार दशकों तक मनोरंजन जगत में रहने के बाद सुरैया ने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। उन्होंने कभी शादी नहीं की और अपना जीवन सादगी से बिताया। उम्र बढ़ने के साथ उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी। अंततः 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।