सुमन कल्याणपुर: एक अद्भुत गायिका जिनका योगदान भुला दिया गया
सुमन कल्याणपुर का निधन और उनकी अनदेखी
मुंबई, 2 जून। फिल्म उद्योग एक ऐसी जगह है जहां केवल वही नाम याद रखे जाते हैं जो लगातार चर्चा में रहते हैं। लेकिन कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से लोगों के दिलों में जगह बनाई, फिर भी समय के साथ उन्हें भुला दिया गया। गायिका सुमन कल्याणपुर भी ऐसी ही एक प्रतिभा थीं, जिनकी आवाज ने संगीत प्रेमियों को दशकों तक मंत्रमुग्ध किया, लेकिन उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसकी वे हकदार थीं।
89 वर्ष की आयु में उनका निधन मुंबई में हुआ। यह देखकर आश्चर्य होता है कि उनके अंतिम संस्कार में केवल एक कलाकार सुरेश वाडकर शामिल हुए। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया कि क्या फिल्म उद्योग अपने पुराने कलाकारों को जल्दी भुला देता है।
सुमन कल्याणपुर और नैय्यर साहब के बीच मतभेद ने उनके करियर को प्रभावित किया। उनकी पहली फिल्म में तीन गाने रिकॉर्ड हुए, लेकिन नैय्यर ने दो गाने हटा दिए और केवल एक लोरी 'कोई पुकारे तुझे धीरे से' को रखा। इसके बाद फिल्म 'आर-पार' में भी उन्हें गाने का मौका मिला, लेकिन नैय्यर का सहयोग नहीं मिला।
लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच विवाद के कारण सुमन को रफी के साथ कई युगल गीत गाने का मौका मिला, लेकिन जब विवाद सुलझा, तो उनके लिए गाने के अवसर बंद हो गए। लता जी ने एक बार कहा था कि सुमन की आवाज उनकी आवाज से मिलती है, जिससे उन्हें कम मौके मिले।
सुधा मल्होत्रा और आशा भोसले के समय में सुमन की आवाज को पसंद किया गया, लेकिन परिस्थितियों ने उनके करियर को प्रभावित किया। लता मंगेशकर और आशा भोसले के निधन के बाद, जब अन्य कलाकारों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया, सुमन को वैसा सम्मान नहीं मिला।
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को ढाका में हुआ था। उन्होंने मुंबई में संगीत की औपचारिक शिक्षा ली। दिलचस्प बात यह है कि उनका फिल्मी करियर शुरू करने का कोई इरादा नहीं था। वह जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पेंटिंग की पढ़ाई कर रही थीं, जब मशहूर गायक तलत महमूद ने उनकी गायकी को सुना और उन्हें फिल्म संगीत में मौका दिया।
भारत सरकार ने 2023 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया, जो उनके संगीत में योगदान की स्वीकृति थी। उनके प्रशंसकों का मानना है कि यह सम्मान उन्हें पहले मिल जाना चाहिए था।