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सुभाष घई ने ओशो के साथ अपने आध्यात्मिक सफर को साझा किया, जानें क्या कहा!

फिल्म निर्माता सुभाष घई ने आध्यात्मिक गुरु ओशो के साथ अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि ओशो की शिक्षाओं ने उनके जीवन को कैसे प्रभावित किया और उन्हें आंतरिक शक्ति की पहचान करने में मदद की। घई ने ओशो के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और उनके विचारों के महत्व को समझने में लगे समय के बारे में भी बताया। इसके अलावा, उन्होंने विनोद खन्ना के ओशो से जुड़ाव का भी उल्लेख किया, जो फिल्म इंडस्ट्री में एक चर्चित विषय रहा है।
 

सुभाष घई का ओशो से जुड़ाव


मुंबई, 29 जुलाई। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई ने आध्यात्मिक गुरु ओशो के प्रति अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि ओशो की शिक्षाओं ने उनके जीवन में गहरा प्रभाव डाला है, जिससे उन्हें आत्म-समझ, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और आंतरिक मजबूती प्राप्त हुई।


सुभाष घई ने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह ओशो की छवि वाले एक प्रचार सामग्री के सामने खड़े हैं। इस तस्वीर के माध्यम से उन्होंने ओशो की विचारधारा के अपने जीवन पर पड़े प्रभाव के बारे में बताया।


उन्होंने लिखा, ''मुझे गुरु की महत्ता को समझने में 50 साल लगे। 1975 में मैंने ओशो को पढ़ा, जिन्होंने मुझे अपने बारे में, दूसरों के बारे में और अंतिम सत्य के बारे में ज्ञान दिया। उन्होंने मुझे अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और हर स्तर पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।''


सुभाष घई ने ओशो के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, ''मैं इस महान गुरु के प्रति अपनी आभार कैसे व्यक्त करूं, जिन्होंने मुझे एक सुखद और शांतिपूर्ण जीवन दिया। धन्यवाद कहना भी बहुत छोटा है।''


यह ध्यान देने योग्य है कि ओशो मूवमेंट की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, जो बाद में एक वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में विकसित हुआ। इस आंदोलन में ध्यान, आत्म-जागरूकता, मानसिक शांति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया गया। ओशो की विचारधारा पारंपरिक सोच से भिन्न थी, जिससे वह विश्वभर में चर्चित रहे।


सुभाष घई अकेले नहीं हैं, जिनका ओशो से संबंध रहा है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता विनोद खन्ना भी ओशो के अनुयायियों में शामिल रहे हैं। अपने करियर के उच्चतम बिंदु पर, विनोद खन्ना ने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बनाकर अमेरिका के ओरेगन में ओशो के आश्रम, रजनीशपुरम, जाने का निर्णय लिया।


विनोद खन्ना उस समय बॉलीवुड के प्रमुख सितारों में से एक थे, और उनका अचानक आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ना फिल्म इंडस्ट्री के लिए चौंकाने वाला था। आश्रम में रहते हुए उन्होंने वहां की जीवनशैली को अपनाया और ध्यान के साथ-साथ दैनिक कार्यों में भी भाग लिया। उन्होंने बागवानी और अन्य कार्यों में भी योगदान दिया और कई वर्षों तक आश्रम से जुड़े रहे।


भारत लौटने के बाद, विनोद खन्ना ने फिर से फिल्मों में काम करना शुरू किया और अपने अभिनय करियर को आगे बढ़ाया। उनके इस आध्यात्मिक सफर की काफी चर्चा हुई।