सलमान अली: छोटे कस्बे से इंडियन आइडल तक का सफर
सपनों की उड़ान: सलमान अली की कहानी
मुंबई, 13 जनवरी। यह कहा जाता है कि जब आप अपने सपनों को साकार करने का संकल्प लेते हैं, तो पूरी दुनिया आपकी मदद करने में जुट जाती है। हरियाणा के मेवात जिले के छोटे से कस्बे पुन्हाना में जन्मे सलमान अली ने भी ऐसा ही सपना देखा। आज उनकी अद्भुत आवाज का जादू हर किसी को भा रहा है।
सलमान की मेहनत और उनकी अनोखी आवाज ने उन्हें इंडियन आइडल सीजन 10 का विजेता बना दिया। उनका जन्मदिन 14 जनवरी को है। सलमान का परिवार संगीत से गहराई से जुड़ा हुआ है; उनके दादा अब्दुल शकूल आकाशवाणी में गजल गाते थे। उनके पूर्वजों से लेकर आज तक, परिवार की आजीविका संगीत पर निर्भर रही है। सलमान ने बचपन में ही जागरण और धार्मिक आयोजनों में गाकर परिवार का खर्च चलाया, लेकिन उनके मन में एक बड़ा सपना था - अपनी आवाज को सही मंच पर लाना।
2011 में उन्हें पहला बड़ा अवसर मिला जब उन्होंने जी टीवी के शो 'सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स' में भाग लिया और पहले रनर-अप बने। इस शो ने उन्हें पूरे देश में पहचान दिलाई, जिसके लिए हरियाणा सरकार ने उन्हें 21 लाख रुपए का पुरस्कार दिया। इसके बाद, 2018 में, उन्होंने सोनी टीवी के प्रसिद्ध रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' के 10वें सीजन में भाग लिया। इस सीजन के जज नेहा कक्कड़, विशाल डडलानी और अनु मलिक थे, जिनके सामने उन्होंने कई यादगार प्रस्तुतियाँ दीं। विशेष रूप से उनका गाना 'सजदा' लोगों के दिलों में बस गया।
फाइनल राउंड में सलमान के साथ नितिन कुमार, विभोर पराशर, अंकुश भारद्वाज और नीलांजना रे थे, लेकिन अपनी मधुर और भावनात्मक आवाज से सलमान ने सभी को पीछे छोड़ते हुए खिताब अपने नाम किया। अंकुश भारद्वाज दूसरे स्थान पर और नीलांजना रे तीसरे स्थान पर रहीं।
सलमान अली की गायकी में पाकिस्तानी कव्वाल उस्ताद नुसरत फतेह अली खान का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उनकी आवाज में सूफियाना रंग और गहराई है। इंडियन आइडल जीतने से पहले, उन्होंने टीवी सीरियल 'चंद्रगुप्त मौर्य' के थीम गाने में भी अपनी आवाज दी थी। जीत के बाद, उन्होंने फिल्म 'सुई धागा' के प्रचार गाने 'सब बधिया है' में भी एक छोटा हिस्सा गाया, जिसके संगीत निर्देशक अनु मलिक थे।
आज सलमान अली केवल एक गायक नहीं हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जो छोटे शहरों और गांवों से आते हैं। मजबूरी में शुरू हुआ उनका शौक अब एक चमकती पहचान बन चुका है।