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सरोज खान: बॉलीवुड की जादूगरनी जिनके डांस ने बदल दी फिल्म इंडस्ट्री

सरोज खान, भारतीय सिनेमा की एक अद्वितीय कोरियोग्राफर, जिन्होंने अपने संघर्ष और प्रतिभा से बॉलीवुड में एक विशेष स्थान बनाया। उनका जीवन और करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जानें कैसे उन्होंने डांस को एक कला के रूप में प्रस्तुत किया और अपने जादुई स्टेप्स से फिल्म इंडस्ट्री को प्रभावित किया। उनके द्वारा कोरियोग्राफ किए गए गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
 

सरोज खान का अद्वितीय सफर


नई दिल्ली, 2 जुलाई। सरोज खान भारतीय सिनेमा की उन महान कोरियोग्राफरों में से एक थीं, जिन्होंने अपने अद्वितीय कौशल से बॉलीवुड में एक विशेष स्थान बनाया। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बहुत कम उम्र में उन्होंने फिल्मों में डांसर के रूप में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर कोरियोग्राफी की दुनिया में प्रवेश किया, जहां हर बड़ा सितारा उनके निर्देशों पर नृत्य करता था।


सरोज खान का जन्म 22 नवंबर 1948 को एक साधारण परिवार में हुआ। उनका बचपन आसान नहीं था, क्योंकि आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों का बोझ उनके साथ हमेशा रहा। मात्र तीन साल की उम्र में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम करना शुरू किया। उस उम्र में जब बच्चे खेलते हैं, सरोज अपने परिवार की मदद के लिए कैमरे के सामने खड़ी थीं।


हालांकि, उनका असली प्यार नृत्य था। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि उनका दिल डांस में बसता है। लेकिन जीवन ने उन्हें सीधे रास्ते पर चलने नहीं दिया। बाल कलाकार के रूप में काम खत्म होने के बाद, उन्हें अचानक इंडस्ट्री से बाहर कर दिया गया। इसके बाद, उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम करना शुरू किया। यह वह समय था जब उन्हें पहचान नहीं मिलती थी, लेकिन वह हर स्टेप को महसूस करती थीं। उनका पहला बड़ा मौका फिल्म 'हावड़ा ब्रिज' में मिला, जहां उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया।


1974 में फिल्म 'गीता मेरा नाम' से उन्होंने कोरियोग्राफर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। यह वह क्षण था जब सरोज खान सिर्फ एक डांसर नहीं रहीं, बल्कि एक क्रिएटर बन गईं। उन्होंने डांस को केवल स्टेप्स नहीं माना, बल्कि हर गाने को एक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया। इसके बाद उनका जादू बॉलीवुड पर छा गया। मिस्टर इंडिया का 'हवा हवाई', तेजाब का 'एक दो तीन', बेटा का 'धक धक करने लगा', और देवदास का 'डोला रे डोला'—ये गाने सिर्फ गाने नहीं थे, बल्कि एक युग बन गए।


सरोज खान की विशेषता यह थी कि वह हर एक्ट्रेस को उसकी पहचान के अनुसार ढाल देती थीं। चाहे वह श्रीदेवी हों, माधुरी दीक्षित, रेखा या ऐश्वर्या राय—हर किसी के डांस में सरोज खान की छाप स्पष्ट दिखाई देती थी। उन्होंने डांस को केवल ग्लैमर नहीं दिया, बल्कि उसमें भावना और कहानी का समावेश किया। उनका करियर लगभग 40 वर्षों तक चला, जिसमें उन्होंने सैकड़ों फिल्मों को कोरियोग्राफ किया और कई राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर अवार्ड्स भी जीते।


बाद में, वह टीवी की दुनिया में भी आईं और 'झलक दिखला जा' और 'नच बलिए' जैसे शो में जज के रूप में नजर आईं।


सरोज खान का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। लगभग 13 साल की उम्र में उन्होंने सोहनलाल से विवाह किया, जो उनसे करीब 30 साल बड़े थे और पहले से शादीशुदा थे। इस शादी से उन्हें 3 बच्चे हुए, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला। बाद में, उन्होंने सरदार रोशन खान से विवाह किया।


3 जुलाई 2020 को जब उनके निधन की खबर आई, तो पूरा फिल्म जगत शोक में डूब गया। लेकिन, आज भी जब बॉलीवुड के सबसे यादगार डांस नंबरों की बात होती है, तो सरोज खान का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उनके द्वारा कोरियोग्राफ किए गए गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।