संजय दत्त ने साझा किए जेल के अनुभव: पिता की आंखों में आंसू और मानसिक संघर्ष
संजय दत्त का कठिन दौर
अभिनेता संजय दत्त ने हाल ही में शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टुनाइट' में अपने जीवन के कठिन समय को याद किया। इस बातचीत में उन्होंने 1993 में हुई गिरफ्तारी और जेल में बिताए गए दिनों के बारे में कई बातें साझा की। संजय ने बताया कि जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया, तब उनके पिता, अभिनेता सुनील दत्त, के सामने ही उन्हें हथकड़ी लगाई गई थी। यह दृश्य देखकर उनके पिता भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। संजय के लिए वह क्षण अत्यंत कठिन था, और उनके पिता ने पुलिस से पूछा कि उनके बेटे के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
1993 में गिरफ्तारी का मामला
संजय दत्त को 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगा था। हालांकि, बाद में उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया। इस मामले में उन्हें जेल की सजा सुनाई गई, और उन्होंने विभिन्न समय पर जेल में सजा काटी। यह समय उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षणों में से एक माना जाता है।
पिता की भावनाएं
शेखर सुमन के साथ बातचीत में संजय ने गिरफ्तारी के उस क्षण को याद करते हुए कहा कि जब पुलिस ने उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया और हथकड़ी लगाई, तो उनके पिता सुनील दत्त सदमे में थे। संजय ने बताया कि उनके पिता की आंखों में आंसू थे, और उन्होंने पुलिस से पूछा कि वे उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं। यह एक पिता के लिए अपने बेटे को इस स्थिति में देखना बेहद भावुक करने वाला था।
जेल में मानसिक संघर्ष
संजय दत्त ने यह भी बताया कि जेल अधिकारियों ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश की। शेखर सुमन ने बताया कि संजय को जेल में 'अंडा सेल' में रखा गया था। इसके बावजूद, उन्होंने कठिन परिस्थितियों में खुद को संभाले रखा। शेखर ने संजय से पूछा कि क्या कभी जेल में उन्हें आत्महत्या का ख्याल आया था। इस बातचीत में संजय ने अपने जेल के अनुभवों और उस समय मानसिक रूप से मजबूत बने रहने की कोशिशों को साझा किया।
जेल में मजेदार किस्सा
संजय ने जेल से जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि एक अधिकारी उनके पास आया और मजाक करते हुए कहा कि उन्हें जेल में सिगरेट नहीं मिलेगी, तो अब वह क्या करेंगे। संजय ने जवाब दिया कि अगर सिगरेट नहीं मिलेगी, तो यहां बीड़ी तो मिल जाएगी। इस जवाब से यह स्पष्ट होता है कि संजय ने उस कठिन समय में भी अपनी हाजिरजवाबी और खुद को संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जेल का वह समय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों का सामना किया। इस बातचीत में उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त के साथ अपने रिश्ते और उस कठिन समय में पिता के भावनात्मक संघर्ष को भी याद किया।