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संजय दत्त ने दहीहंडी विवाद पर दी सफाई, कहा मजाक में कही थी बात

अभिनेता संजय दत्त ने दहीहंडी समारोह में अपने बयान पर सफाई दी है, जिसमें उन्होंने मजाक में कहा था कि वह मराठी नहीं सीख पाए। उन्होंने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को फोन कर कहा कि यदि उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची हो, तो वह माफी मांगते हैं। इस विवाद ने सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना दिया है। जानें इस पूरी कहानी के बारे में।
 

संजय दत्त का बयान और सफाई

मुंबई, 10 सितंबर। अभिनेता संजय दत्त ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से फोन पर बात की और दहीहंडी समारोह में मराठी भाषा को लेकर अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनका बयान मजाक में था और यदि इससे किसी को ठेस पहुंची हो, तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं।


सूत्रों के अनुसार, जब मंत्री सरनाईक एक बैठक में थे, तब संजय दत्त ने उन्हें फोन किया। बातचीत की शुरुआत उन्होंने मराठी में "प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र..." कहकर की।


संजय दत्त ने ठाणे में दहीहंडी कार्यक्रम के दौरान मजाक में कहा था कि "मैं छह साल येरवडा जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख पाया।" उन्होंने बताया कि इस टिप्पणी को गंभीरता से लिया गया और इससे गलत संदेश फैल गया।


उन्होंने सरनाईक से कहा, "मुझे अच्छी मराठी आती है। अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।"


गौरतलब है कि ठाणे में प्रताप सरनाईक के संस्कृति युवा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दहीहंडी महाराष्ट्र की प्रमुख दहीहंडियों में से एक मानी जाती है। इस वर्ष के कार्यक्रम में संजय दत्त, सुनील शेट्टी, भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव सहित कई फिल्मी हस्तियां, राजनीतिक नेता और कारोबारी शामिल हुए थे।


मराठी भाषा को लेकर सरनाईक के सख्त रुख के चलते कार्यक्रम में कई सेलिब्रिटीज ने मराठी में संबोधन किया। इसी दौरान संजय दत्त का "मराठी नहीं सीख पाया" वाला बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इसकी आलोचना की और सवाल उठाया कि क्या मराठी सीखने की अपेक्षा केवल रिक्शा और टैक्सी चालकों से ही की जाती है।


फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन समय में बालासाहेब ठाकरे हमेशा उनके साथ खड़े रहे और वह उनके प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं।