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संजय गुप्ता ने बॉलीवुड फिल्मों में सिगरेट के प्रचार पर उठाए सवाल

फिल्म निर्माता संजय गुप्ता ने बॉलीवुड फिल्मों के पोस्टर्स में लीड एक्टर्स को सिगरेट पीते हुए दिखाने पर चिंता जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एंटी-स्मोकिंग संदेश फिल्म के दौरान दिखाए जाते हैं, तो ऐसे पोस्टर्स का क्या प्रभाव होता है? इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जिसमें कई यूजर्स ने विभिन्न दृष्टिकोण साझा किए हैं। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और गुप्ता के विचार।
 

सिगरेट के पोस्टर्स पर संजय गुप्ता की आपत्ति



मुंबई, 29 सितंबर (वेब वार्ता)। फिल्म निर्माता संजय गुप्ता ने बॉलीवुड की फिल्मों के पोस्टर्स में लीड एक्टर्स को सिगरेट पीते हुए दिखाने पर चिंता व्यक्त की है।


गुप्ता ने रविवार को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर तीन फिल्मों के पोस्टर्स साझा किए, जिनमें संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर, आदित्य धर की ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह और संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में विक्की कौशल शामिल थे। इन सभी तस्वीरों में एक समानता थी कि तीनों एक्टर्स सिगरेट के साथ नजर आ रहे थे।


संजय गुप्ता ने यह सवाल उठाया कि जब फिल्म के पोस्टर्स में स्मोकिंग को इस तरह दिखाया जा रहा है, तो सिनेमाघरों में एंटी-स्मोकिंग संदेशों का क्या प्रभाव रह जाता है?


उन्होंने लिखा, “फिल्मों के पहले और दौरान हमें जो एंटी-स्मोकिंग रील्स दिखनी पड़ती हैं, उनका क्या मतलब है, जब पोस्टर्स ही ऐसे हैं?”


गुप्ता की पोस्ट के बाद कमेंट सेक्शन में बहस छिड़ गई। एक यूजर ने उन्हें उनकी 2002 में आई फिल्म ‘कांटे’ की याद दिलाई, जिसमें संजय दत्त सिगरेट पीते हुए दिखाई दिए थे।


यूजर ने लिखा, ”यह विडंबना है कि यह बात फिल्म ‘कांटे’ के निर्देशक से आ रही है, जिसमें सिगरेट के धुएं का जिक्र है... क्या विडंबना है।”


इस पर संजय गुप्ता ने उत्तर दिया कि उस समय स्मोकिंग के प्रति नियम और जागरूकता के संदेश भिन्न थे।


उन्होंने कहा, ”उस समय नो-स्मोकिंग विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस।”


एक अन्य यूजर ने यह भी बताया कि भारतीय समाज में सिगरेट पीने को मर्दानगी से जोड़ा जाता है।


यूजर ने लिखा, ”क्योंकि इन लोगों को लगता है कि सिगरेट ही एक चीज है, जो किसी आदमी को मर्दाना दिखाती है। यह रचनात्मकता की कमी है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री मर्दानगी को जरूरत से ज्यादा महत्व देने की समस्या से जूझ रही है। कंटेंट, कहानी और क्रिएटिविटी की किसी को परवाह नहीं है।”