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शशि कपूर: हिंदी सिनेमा के महानायक की याद में जैकी श्रॉफ की भावुक श्रद्धांजलि

शशि कपूर, हिंदी सिनेमा के एक महानायक, के जन्मदिन पर जैकी श्रॉफ ने उन्हें याद करते हुए भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। शशि कपूर ने न केवल फिल्मों में बल्कि थिएटर में भी अपनी छाप छोड़ी। उनके जीवन के कई पहलुओं, जैसे उनकी पत्नी जेनिफर के साथ का रिश्ता और उनके बच्चों की परवरिश, को इस लेख में उजागर किया गया है। जानें उनके योगदान और यादों के बारे में।
 

शशि कपूर का योगदान और यादें


मुंबई, 18 मार्च। शशि कपूर को हिंदी सिनेमा के उन अद्वितीय नायकों में गिना जाता है, जिन्होंने न केवल बड़े पर्दे पर बल्कि थिएटर में भी अपनी छाप छोड़ी। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर, प्रसिद्ध अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें याद करते हुए एक भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की।


जैकी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शशि कपूर की कुछ पुरानी तस्वीरें साझा कीं और लिखा, "आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।"


शशि कपूर ने कई सफल फिल्मों में काम किया, जैसे 'जब-जब फूल खिले', 'कन्यादान', 'प्यार का मौसम', 'एक श्रीमान एक श्रीमती', 'हसीना मान जाएगी', 'आ गले लग जा', 'फकीरा', 'फांसी', 'चोर मचाए शोर', 'मुक्ति', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'हीरालाल पन्नालाल', 'जुनून', 'स्वयंवर', और 'शर्मीली'। उन्होंने कई यादगार गाने भी गाए हैं।


भारत सरकार ने कला और सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा, 2015 में उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया, जिससे वे अपने परिवार के तीसरे सदस्य बने, जिन्होंने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किया।


शशि कपूर एक ऐसे व्यक्ति थे, जो सामाजिक समारोहों में कम ही नजर आते थे और उनकी पत्नी के अलावा किसी अन्य महिला के साथ उनका नाम नहीं जुड़ा। कहा जाता है कि थिएटर के दिनों में उन्हें जेनिफर से प्यार हो गया था।


हालांकि, जेनिफर से विवाह करना आसान नहीं था, लेकिन कई प्रयासों के बाद उन्होंने शादी कर ली। शादी के बाद, शशि ने अनुशासित जीवन जीना शुरू किया, जिसमें जेनिफर उनकी डाइट का ध्यान रखती थीं। वे परिवार के साथ समय बिताने लगे और रविवार को भी परिवार के साथ रहते थे।


शशि ने सिगरेट और शराब से दूरी बना ली थी, जिसके कारण वे हमेशा फिट और स्वस्थ दिखते थे। लेकिन जेनिफर के कैंसर से जूझने के बाद, 7 सितंबर 1984 को उनकी मृत्यु हो गई। पत्नी की मौत के बाद, शशि कपूर ने अपने तीन बच्चों करण, कुणाल और संजना की अकेले परवरिश की।