शम्मी कपूर: कैसे बने 'याहू स्टार' और 'इंडिया के एल्विस प्रेस्ली'?
शम्मी कपूर का अद्भुत सफर
मुंबई, 13 अगस्त। अभिनेता शम्मी कपूर ने अपनी आकर्षक मुस्कान, अद्भुत ऊर्जा, अनोखे डांस स्टाइल और बेफिक्र अंदाज से दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बना लिया। उन्हें 'याहू' स्टार और 'इंडिया का एल्विस प्रेस्ली' के नाम से भी जाना जाता था। उनका करियर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की थिएटर कंपनी से शुरू हुआ, जहां उन्हें शुरुआती दिनों में केवल 50 रुपए मासिक मिलते थे।
शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था। वह प्रसिद्ध अभिनेता और रंगमंच कलाकार पृथ्वीराज कपूर के पुत्र थे और राज कपूर तथा शशि कपूर के भाई थे। पढ़ाई में रुचि कम होने के कारण, उन्होंने 1948 में अपने पिता की थिएटर कंपनी पृथ्वी थिएटर्स से जुड़कर अभिनय की दुनिया में कदम रखा। यहां उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करना शुरू किया, और उनकी शुरुआती तनख्वाह 50 रुपए थी। 1952 तक वह थिएटर से जुड़े रहे, और जब उन्होंने इसे छोड़ा, तो उनकी अंतिम तनख्वाह 300 रुपए थी।
थिएटर के बाद, शम्मी कपूर ने फिल्मों की ओर रुख किया। उन्होंने महेश कौल के निर्देशन में कारदार फिल्म कंपनी के साथ 'जीवन ज्योति' में बतौर नायक काम किया। उनकी पहली नायिका चांद उस्मानी थीं। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1952 से 1955 के बीच उन्होंने 'रेल का डिब्बा', 'लैला मजनू', 'ठोकर', 'शमा परवाना', और 'हम सब चोर हैं' जैसी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन इनमें से अधिकांश ने दर्शकों का दिल नहीं जीता।
कई असफलताओं के बाद, 1957 में 'तुमसा नहीं देखा' ने उनकी किस्मत बदल दी। इसके बाद 'दिल देके देखो' ने उनकी नई छवि को मजबूत किया। 1961 में 'जंगली' ने उन्हें एक बड़े स्टार बना दिया और इसी फिल्म ने उन्हें 'याहू' स्टार का खिताब दिलाया। इसके बाद 'प्रोफेसर', 'चाइना टाउन', 'कश्मीर की कली', 'ब्लफ मास्टर', 'जानवर', 'राजकुमार', 'तीसरी मंजिल', 'एन इवनिंग इन पेरिस', 'ब्रहमचारी' और 'अंदाज' जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
शम्मी कपूर अपने डांस के लिए भी जाने जाते थे, और उनकी ऊर्जा ही उनकी पहचान बन गई। 'तीसरी मंजिल' और 'कश्मीर की कली' जैसी फिल्मों में उनका अंदाज आज भी याद किया जाता है। उम्र बढ़ने पर, उन्होंने हीरो की बजाय सहायक भूमिकाएं निभाना शुरू किया और 'विधाता' जैसी फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी।
'ब्रहमचारी' के लिए उन्हें 1969 में फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। इसके अलावा, उन्हें फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी मिला।
14 अगस्त 2011 को 79 वर्ष की आयु में शम्मी कपूर का निधन मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ। वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे और डायलिसिस पर थे। उनकी मृत्यु किडनी फेल होने के कारण हुई।