विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की शादी: कोडवा परंपरा की अनोखी झलक
शादी का भव्य समारोह
एक्टर विजय देवरकोंडा और एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने गुरुवार को उदयपुर में भव्य तरीके से शादी की। इस जोड़े ने अपनी जिंदगी को एक साथ बिताने का निर्णय लिया, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में एक पावर कपल के रूप में उनकी शादी चर्चा का विषय बन गई। इस शादी ने कोडवा समुदाय को भी सुर्खियों में ला दिया।
कोडवा समुदाय की पहचान
कोडवा ट्राइब कर्नाटक के खूबसूरत पहाड़ों और कॉफी बागानों के बीच बसे कोडगु (कूर्ग) क्षेत्र में निवास करती है। रश्मिका मंदाना इसी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उनकी शादी पहले पारंपरिक तेलुगु रीति-रिवाजों से हुई, जिसमें सप्तपदी, मंगलसूत्र, श्रृंगार और मंत्र-श्लोक शामिल थे। यह प्रक्रिया उत्तर भारतीय परंपराओं से मिलती-जुलती है।
कोडवा परंपराओं का महत्व
शाम को, कपल ने रश्मिका के कोडवा रीति-रिवाजों के अनुसार भी शादी की, जो उनके साथ रहने की नींव है। कोडवा समुदाय अपनी समृद्ध परंपराओं, बहादुरी और अनोखे पहनावे के लिए जाना जाता है। वे अपनी भाषा, "कोडवा टक्क" बोलते हैं, जो उनकी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कोडवा संस्कृति का इतिहास
कोडवा लोग पुरानी योद्धा परंपराओं से जुड़े हुए हैं, जिससे उनके समुदाय में सैन्य परंपराओं का विशेष महत्व है। कई कोडवा परिवारों में पारंपरिक हथियारों को आज भी सम्मान के साथ रखा जाता है। कोडवा समुदाय को भारत के सबसे बहादुर समुदायों में से एक माना जाता है।
ओक्का प्रणाली और पारिवारिक संरचना
कोडवा समाज की एक विशेषता उनका "ओक्का" सिस्टम है, जिसका अर्थ है संयुक्त परिवार या जनजातीय प्रणाली। हर परिवार का एक पुश्तैनी घर होता है, जिसे "ऐनमाने" कहा जाता है। यह सिर्फ एक घर नहीं है, बल्कि पूरे कबीले की पहचान और इतिहास का प्रतीक है।
कोडवा का पारंपरिक पहनावा
कोडवा पुरुष "कुप्पाया" नामक लंबा कोट पहनते हैं, जिसे बेल्ट से बांधा जाता है। इसके साथ वे सिर पर एक विशेष पगड़ी और कमर पर पारंपरिक खंजर पहनते हैं। कोडवा महिलाएं साड़ी को पीछे से लपेटती हैं, जिससे उनका पहनावा भीड़ से अलग नजर आता है।
कोडवा का भोजन और त्योहार
कोडवा भोजन में स्थानीय मसाले और नॉन-वेजिटेरियन डिशेज़ शामिल हैं। यहाँ की सबसे प्रसिद्ध डिश "पंडी करी" है। कोडवा समुदाय के तीन प्रमुख त्योहार हैं: पुट्टारी, कैलपोड, और कावेरी संक्रमण।
कोडवा शादी की विशेषताएँ
कोडवा शादियाँ सादगी और प्रकृति से जुड़ी होती हैं। यहाँ शादी को केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो ओक्का का मिलन माना जाता है। दूल्हा पारंपरिक कपड़े पहनता है, जबकि दुल्हन विशेष साड़ी और गहने पहनती है।
उत्तर भारतीय परंपराओं से भिन्नता
कोडवा शादियों में उत्तर भारतीय परंपराओं की तरह अग्नि के फेरे नहीं होते। इसके बजाय, परिवार के बड़े-बुजुर्ग आशीर्वाद देते हैं। दूल्हा-दुल्हन को चावल और फूलों से आशीर्वाद दिया जाता है, और पारंपरिक गाने और नृत्य का आयोजन किया जाता है।