वाशु भगनानी का बड़ा खुलासा: 'कुली नंबर 1' के लिए गोविंदा और डेविड धवन को कार गिफ्ट करने की कहानी
वाशु भगनानी का अनुभव साझा करना
मुंबई, 1 जून। फिल्म उद्योग में वाशु भगनानी और टिप्स इंडस्ट्रीज के प्रमुख रमेश तौरानी के बीच चल रहे कानूनी विवाद ने काफी सुर्खियाँ बटोरी हैं। इस संदर्भ में, वाशु भगनानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें की हैं।
उन्होंने अपने करियर, डेविड धवन और गोविंदा के साथ संबंधों के अलावा, रमेश तौरानी के साथ अपने रिश्तों पर भी चर्चा की। वाशु ने कहा कि उन्होंने हमेशा उन लोगों का सम्मान करने की कोशिश की है जिन्होंने उनकी फिल्मों की सफलता में योगदान दिया, लेकिन कुछ अनुभवों ने उन्हें निराश भी किया।
वाशु ने फिल्म 'कुली नंबर 1' का जिक्र करते हुए बताया कि यह उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक थी। उन्होंने कहा, 'इस फिल्म में डेविड धवन और गोविंदा ने बेहतरीन काम किया, जिसके लिए मैंने उन्हें कार उपहार देने का निर्णय लिया। उस समय टिप्स कंपनी की भी फिल्म में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, इसलिए मैंने सुझाव दिया कि यह उपहार दोनों मिलकर दें।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब मैंने डेविड और गोविंदा को कार देने की बात की, तो रमेश तौरानी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसलिए मैंने अकेले ही यह जिम्मेदारी उठाई और दोनों को कार गिफ्ट की। मेरा मानना है कि सफलता का आनंद केवल निर्माता या निवेशक तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए जो मेहनत और प्रतिभा से फिल्म को सफल बनाते हैं।'
वाशु ने तौरानी परिवार के साथ अपने पुराने रिश्तों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'फिल्मों में आने से पहले मेरा ऑडियो कैसेट बनाने का व्यवसाय था और उस दौरान मेरी इंडस्ट्री में अच्छी पहचान थी। इसी दौरान मेरी मुलाकात तौरानी परिवार से हुई और म्यूजिक बिजनेस के जरिए हमारे परिवारों के बीच अच्छे संबंध बने।'
उन्होंने कहा, 'मेरी करियर की शुरुआत से ही डेविड धवन मेरे साथ जुड़े रहे हैं। हमने मिलकर कई सफल फिल्में दीं और लंबे समय तक साथ काम किया। इंडस्ट्री के रिकॉर्ड इस बात की गवाही देते हैं कि मैंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत से ही डेविड धवन के साथ मजबूत पेशेवर रिश्ता बनाया था।'
वाशु ने कहा, 'समय के साथ कुछ घटनाएं हुईं, जिन्होंने मुझे दुख पहुंचाया। जिन लोगों पर मैंने विश्वास किया, उन्होंने मुझे निराश किया।'
उन्होंने अंत में कहा, 'कभी-कभी लंबे समय तक चुप रहना लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि व्यक्ति सब कुछ स्वीकार कर चुका है। इसी वजह से मैंने अपनी बात सामने रखने का निर्णय लिया है। मैं अपने अनुभव और नजरिए को साझा कर रहा हूं ताकि मेरी बात भी लोगों तक पहुंच सके।'