वहीदा रहमान की फिल्मी यात्रा: कैसे 13 साल की उम्र में मिलीं पहली फिल्में?
वहीदा रहमान का फिल्मी सफर
मुंबई, 6 सितंबर। प्रसिद्ध अभिनेत्री वहीदा रहमान ने एक बार साझा किया कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम कैसे रखा। 2019 में, जब वहीदा, आशा पारेख और हेलेन 'द कपिल शर्मा शो' पर गई थीं, तब शो के मेज़बान कपिल शर्मा ने उनसे उनके करियर की शुरुआत के बारे में पूछा।
इस पर वहीदा ने कहा, "मैं खुद को बेहद भाग्यशाली मानती हूं। मैंने भरतनाट्यम सीखा और मंच पर नृत्य प्रस्तुत किया। उस समय, क्षेत्रीय फिल्मों की अधिकतर शूटिंग चेन्नई में होती थी। किसी ने मेरी तस्वीरें देखीं और मुझे घर बैठे फिल्म के प्रस्ताव मिलने लगे। उस समय मेरी उम्र केवल 13 साल थी, लेकिन मेरे माता-पिता ने कहा कि यह अभी के लिए बहुत जल्दी है।"
बाद में, वहीदा ने एक तेलुगु फिल्म में लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जो बहुत लोकप्रिय हो गया। इसके बाद, उन्हें एक अन्य तेलुगु फिल्म में दिग्गज अभिनेता एनटी रामा राव के साथ मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला।
उनका बॉलीवुड करियर तब शुरू हुआ जब हैदराबाद में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध फिल्म निर्माता गुरु दत्त से हुई। गुरु दत्त ने उन्हें मुंबई आने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उनका करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
वहीदा रहमान ने 1955 में तेलुगु फिल्म 'रोजुलु मरायी' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके एक साल बाद, 1956 में, उन्होंने निर्देशक राज खोसला की फिल्म 'सीआईडी' से हिंदी फिल्म उद्योग में कदम रखा। यह फिल्म गुरु दत्त द्वारा निर्मित थी।
गुरु दत्त के साथ काम करते हुए, वहीदा कई यादगार फिल्मों का हिस्सा बनीं, जैसे 'प्यासा' (1957), 'कागज के फूल' (1959), 'चौदहवीं का चांद' (1960) और 'साहिब बीबी और गुलाम' (1962)।
इसके बाद, उन्होंने 'गाइड' (1965), 'नीलकमल' (1968) और 'खामोशी' (1969) जैसी शानदार फिल्मों में अभिनय कर हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान को और मजबूत किया।
वहीदा रहमान को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जिनमें 1972 में पद्मश्री और 2011 में पद्म भूषण शामिल हैं।