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वहीदा रहमान का फिल्मी सफर: कैसे बनीं वो बॉलीवुड की दिग्गज?

वहीदा रहमान, जो भारतीय सिनेमा की एक प्रतिष्ठित अभिनेत्री हैं, ने हाल ही में अपने करियर की शुरुआत के बारे में रोचक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने भरतनाट्यम सीखा और किस प्रकार उन्हें फिल्मों के प्रस्ताव मिले। उनके करियर की शुरुआत गुरु दत्त से मुलाकात के बाद हुई, जिसने उन्हें मुंबई आने के लिए प्रेरित किया। जानें उनके यादगार फिल्मों और पुरस्कारों के बारे में, जो उन्हें भारतीय सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाते हैं।
 

वहीदा रहमान का अद्भुत सफर


मुंबई, 6 सितंबर। प्रसिद्ध अभिनेत्री वहीदा रहमान ने हाल ही में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत के बारे में दिलचस्प बातें साझा कीं। जब वह 2019 में 'द कपिल शर्मा शो' पर गई थीं, तो होस्ट कपिल शर्मा ने उनसे उनके करियर की शुरुआत के बारे में पूछा।


वहीदा ने बताया, "मैं खुद को बेहद भाग्यशाली मानती हूं। मैंने भरतनाट्यम सीखा था और मंच पर नृत्य प्रस्तुत करती थी। उस समय, क्षेत्रीय फिल्मों की अधिकतर शूटिंग चेन्नई में होती थी। किसी ने मेरी तस्वीरें देखीं और मुझे घर बैठे फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे। उस समय मेरी उम्र केवल 13 साल थी, लेकिन मेरे माता-पिता ने कहा कि यह अभी के लिए बहुत जल्दी है।"


बाद में, वहीदा ने एक तेलुगु फिल्म में लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जो बहुत लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्हें एक और तेलुगु फिल्म में दिग्गज अभिनेता एनटी रामा राव के साथ मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला।


उनका बॉलीवुड करियर तब शुरू हुआ जब हैदराबाद में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध फिल्म निर्माता गुरु दत्त से हुई। गुरु दत्त ने उन्हें मुंबई आने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उनका करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।


वहीदा रहमान ने 1955 में तेलुगु फिल्म 'रोजुलु मरायी' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके एक साल बाद, 1956 में, उन्होंने निर्देशक राज खोसला की फिल्म 'सीआईडी' से हिंदी फिल्म उद्योग में कदम रखा। यह फिल्म गुरु दत्त द्वारा निर्मित थी।


गुरु दत्त के साथ काम करते हुए, वहीदा कई यादगार फिल्मों का हिस्सा बनीं, जिनमें 'प्यासा' (1957), 'कागज के फूल' (1959), 'चौदहवीं का चांद' (1960) और 'साहिब बीबी और गुलाम' (1962) जैसी क्लासिक फिल्में शामिल हैं।


इसके बाद, उन्होंने 'गाइड' (1965), 'नीलकमल' (1968) और 'खामोशी' (1969) जैसी शानदार फिल्मों में अभिनय कर हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान को और मजबूत किया।


वहीदा रहमान को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जिनमें 1972 में पद्मश्री और 2011 में पद्म भूषण शामिल हैं।


--News Media


एएमटी/डीकेपी