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रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग: गोलू पंडित की गिरफ्तारी में नए खुलासे

फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग के मामले में गोलू पंडित की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि गोलू बिष्णोई गैंग से जुड़ा था और उसने फायरिंग के लिए मुख्य शूटर को पैसे देने का वादा किया था। पुलिस ने इस मामले में तेजी से जांच की है और कई संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और क्या है इसके पीछे का सच।
 

फायरिंग मामले की जांच में तेजी




मुंबई में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के निवास पर हुई फायरिंग के मामले की जांच में नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं। इस मामले में गिरफ्तार प्रदीप शर्मा, जिसे गोलू पंडित के नाम से जाना जाता है, से मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा पूछताछ की जा रही है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।


गोलू पंडित ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वह लगभग दो साल पहले बिष्णोई गैंग से जुड़ा था और लगातार उनके संपर्क में था। उसने बताया कि वह सीधे लॉरेंस बिष्णोई से नहीं मिला, बल्कि उनके बीच एक अन्य व्यक्ति था, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। गोलू को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया गया है और वह वर्तमान में क्राइम ब्रांच की हिरासत में है।


पुलिस के अनुसार, गोलू का मुख्य कार्य गैंग के लिए युवाओं की भर्ती करना था, जो पैसों के लालच में आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते थे। जांच में यह भी पता चला है कि इस हमले के लिए मुख्य शूटर दीपक शर्मा को 3 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, जिसकी व्यवस्था गोलू ने की थी।


दीपक और गोलू दोनों आगरा के बाह क्षेत्र के निवासी हैं और पहले से एक-दूसरे को जानते थे। आर्थिक तंगी के कारण वे इस साजिश में शामिल हुए। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले को सुलझाने के लिए आगरा में लगभग 8 दिनों तक ऑपरेशन चलाया और तकनीकी जांच के तहत 1600 मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया।


पुलिस ने मोबाइल टावर लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और नेटवर्क एनालिसिस के माध्यम से संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाया। इसी दौरान एक महत्वपूर्ण मोबाइल नंबर सामने आया, जिसने पूरे मामले को सुलझाने में मदद की।


जांच के दौरान आरजू बिष्णोई नामक व्यक्ति की भूमिका भी उजागर हुई है, जिसके बाद पुलिस ने इस एंगल से जांच को और तेज कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले के पीछे एक संगठित आपराधिक नेटवर्क हो सकता है। एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि आरोपियों ने फायरिंग का तरीका YouTube पर वीडियो देखकर सीखा था।


गोलू पंडित पहले से ही बिष्णोई गैंग के संपर्क में था और राजस्थान में फायरिंग की एक घटना में शामिल होने के आरोप में जेल जा चुका है। इससे यह संदेह और मजबूत हो गया है कि इस हमले के पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है। फिलहाल, मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की गहन जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है.